गणतंत्र दिवस पर भारत की Tech यात्रा: पहली बाइक से 5G तक का सफर
भारत ने गणतंत्र के 77 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इन वर्षों में देश ने आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ तकनीकी क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति की है। आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, जिसका श्रेय बड़े पैमाने पर तकनीकी क्रांति को जाता है। यह यात्रा कुछ शुरुआती कदमों से शुरू हुई, जिसने देश के भविष्य की दिशा तय की।
संचार क्रांति की शुरुआत: रेडियो और मोबाइल
भारत में संचार क्रांति की शुरुआत आजादी से पहले ही हो गई थी। देश का पहला कॉमर्शियल रेडियो प्रसारण वर्ष 1927 में शुरू हुआ। 1970 और 80 के दशक तक रेडियो रखना भी एक बड़ी बात थी, जिसके लिए डाकघर से ‘रेडियो लाइसेंस’ प्राप्त करना अनिवार्य होता था। रेडियो ने देश के दूरदराज के इलाकों तक सूचना पहुंचाई।
इसके बाद मोबाइल फोन ने संचार को पूरी तरह बदल दिया। भारत में पहली मोबाइल कॉल 31 जुलाई 1995 को तत्कालीन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ज्योति बसु और केंद्रीय संचार मंत्री सुखराम के बीच हुई थी। उस समय कॉल पर 16 रुपये प्रति मिनट का भारी शुल्क लगता था। आज भारत में 90 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता हैं और डेटा की खपत दुनिया में सबसे अधिक है, जो इस सफर की सफलता को दर्शाता है।
डिजिटल युग की नींव: कंप्यूटर और परिवहन
डिजिटल युग की नींव भारत में 1956 में रखी गई थी, जब देश का पहला कंप्यूटर (HEC-2M) कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान में स्थापित किया गया था। यह विशाल मशीन उस समय के लिए एक क्रांतिकारी कदम था। आज भारत AI और सुपरकंप्यूटिंग मिशन ‘ऐरावत’ जैसी परियोजनाओं में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है।
परिवहन के क्षेत्र में भी भारत ने लंबा सफर तय किया है। देश में पहली मोटरसाइकिल 1920 के दशक में जी.डी. नायडू द्वारा खरीदी गई थी, जिन्हें ‘भारत का एडिसन’ भी कहा जाता है। उन्होंने इस मशीन को खोलकर इसके मैकेनिक्स को समझा और 1937 में पहली इलेक्ट्रिक मोटर का निर्माण किया। आज भारत मोटरसाइकिल का सबसे बड़ा बाजार है, जहां 22.1 करोड़ से अधिक रजिस्टर्ड बाइक्स हैं।
