कानपुर चिड़ियाघर में घड़ियाल के बच्चों को कीड़ों से मिल रहा पोषण, जानिए खास वजह
कानपुर चिड़ियाघर में पहली बार जन्मे घड़ियाल के 15 बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। जून में जन्मे इन बच्चों का वजन लगातार घट रहा था, जिससे पशु चिकित्सक चिंतित थे। मछली का कीमा खाने के बावजूद बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार न होने पर, अब उनके आहार में बरसाती कीड़ों को शामिल किया गया है। यह कदम घड़ियाल के बच्चों के जीवित रहने की दर बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों के अनुसार, घड़ियाल के बच्चे अंडे से निकलने के बाद पहले 15 दिनों तक माँ की जर्दी से पोषण प्राप्त करते हैं। इसके बाद उन्हें भोजन दिया जाता है। शुरुआत में मछली का कीमा खिलाया गया, लेकिन वजन घटने लगा। बच्चों के सर्वाइवल के लिए प्रोटीन का अच्छा स्रोत माने जाने वाले बरसाती कीड़ों को अब उनके आहार का हिस्सा बनाया गया है। इसके लिए बाड़े में एक बल्ब लगाया गया है, जिसकी रोशनी से आकर्षित होकर कीड़े अंदर गिरते हैं और बच्चे उन्हें खाते हैं।
इस साल जून में घड़ियाल के 15 बच्चों ने जन्म लिया था, जो चिड़ियाघर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। आमतौर पर घड़ियालों के केवल 30 प्रतिशत बच्चे ही जीवित रह पाते हैं। बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए, चिड़ियाघर प्रशासन ने यह नया प्रयोग किया है, जिससे उम्मीद है कि कीड़ों के सेवन से उनका वजन बढ़ेगा और वे स्वस्थ रहेंगे।
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