झारखंड में आवास बोर्ड की जमीन पर अवैध कब्जा, BJP-AJSU कार्यालय भी दायरे में; High Court के आदेश की अनदेखी
रांची की हरमू हाउसिंग कॉलोनी में आवासीय भूखंडों का बड़े पैमाने पर अवैध व्यावसायिक उपयोग जारी है। झारखंड राज्य आवास बोर्ड की लीज शर्तों और हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, नियम उल्लंघन को रोकने में प्रशासन नाकाम रहा है। यह मामला दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है, क्योंकि इस दायरे में राजनीतिक दल भाजपा और आजसू पार्टी के कार्यालय भी शामिल हैं।
कॉलोनी में वर्षों से आवासीय भूखंडों और भवनों का व्यावसायिक उपयोग चल रहा है। झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा कई मामलों में स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। उच्च न्यायालय ने एलपीए संख्या 22/2022 के तहत न्यायादेश पारित किया था, जिसका अनुपालन आज तक नहीं हुआ है।
आवास बोर्ड के नोटिस भी बेअसर
आवास बोर्ड ने जुलाई 2022 में नगर विकास एवं आवास विभाग की अधिसूचना के नियमों का हवाला देते हुए कई लीजधारियों को नोटिस जारी किया था। नोटिस में स्पष्ट किया गया था कि आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक उपयोग पाए जाने पर आवंटन रद किया जा सकता है और संबंधित पक्षों को 15 दिनों के भीतर स्थिति स्पष्ट करनी होगी। आदेश के तीन वर्ष बीतने वर्ष बीतने के बावजूद न तो आवंटन रद हुए और न ही व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगी। इस संबंध में आवास बोर्ड के अध्यक्ष संजय लाल पासवान ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
आवास बोर्ड और लीजधारकों के बीच हुए इकरारनामे में स्पष्ट प्रावधान है कि आवासीय उपयोग के बदले व्यावसायिक उपयोग किए जाने पर आवंटन आदेश रद किया जा सकता है। इसके बावजूद कॉलोनी में 275 से अधिक आवंटियों द्वारा व्यावसायिक गतिविधियां संचालित किए जाने का आरोप है।
नियमों की अनदेखी कर कई भूखंड हासिल किए
झारखंड राज्य आवास बोर्ड नियमावली 2004 के अध्याय-2 की धारा 8(घ) के अनुसार, आवेदक या उसके परिवार के नाम पर संबंधित शहर के आठ किलोमीटर के दायरे में पहले से भूमि या मकान होने पर नया आवंटन नहीं किया जा सकता। आरोप है कि इस नियम की अनदेखी करते हुए कई प्रभावी लोगों ने एक से अधिक आवास और भूखंड हासिल कर रखे हैं।
हाउसिंग बोर्ड की स्थापना का मूल उद्देश्य उन लोगों को आवास उपलब्ध कराना था, जिनके पास रांची में रहने के लिए घर नहीं है। लेकिन आज हरमू हाउसिंग कॉलोनी में राजनीतिक दलों के कार्यालय, सरकारी उपक्रमों के दफ्तर, बैंक और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं। आवंटियों की सूची में बड़े नेता, अधिकारी और व्यापारी भी शामिल बताए जाते हैं।
इस पूरे मामले को लेकर कई प्रकरण पहले से अदालत में लंबित हैं। वहीं, सामाजिक संगठनों ने अब इसे लेकर जनहित याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। हरमू के अलावा बरियातु हाउसिंग कॉलोनी में भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण का मुद्दा उठ रहा है।
