काम न मिलने से आहत IAS रिंकू सिंह राही का इस्तीफा, पिता बोले- ईमानदारी की सज़ा मिली
यूपी कैडर के 2023 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने काम न मिलने से नाराज होकर मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इस मामले में उनके पिता ने दुख जताते हुए कहा कि उनके बेटे को काम नहीं दिया जा रहा था, जबकि वह देशभक्त, ईमानदार और मेहनती अधिकारी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रिंकू सिंह ने 2009 में मुजफ्फरनगर में एक बड़े घोटाले का खुलासा करते हुए जानलेवा हमला झेला था, जिसमें उनकी एक आंख और जबड़ा चला गया था।
ईमानदारी की कीमत
रिंकू सिंह के पिता ने बताया कि इतनी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और कड़ी मेहनत के बाद 2023 में IAS बने। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है और वह जो भी फैसला लेते हैं, वह देशहित में होता है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार साधारण जीवन जीता है और आज भी मेहनत के दम पर घर चल रहा है। 2009 में गोली लगने के बाद मुजफ्फरनगर आने-जाने में ही उनका काफी समय और संसाधन खर्च हो गया था।
काम मांगने पर भी उपेक्षा
आईएएस अफसर के पिता ने कहा कि रिंकू सिंह ने इस्तीफा नहीं दिया है, बल्कि काम मांगा है। उन्हें काम क्यों नहीं दिया जा रहा? इतनी मेहनत से वह आईएएस बने और देशहित के लिए गोली भी खाई, उसके बावजूद उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है। परिवार की यही इच्छा है कि वह देश हित में ईमानदारी से काम करें और सरकार इस पर सही निर्णय ले। ईमानदारी की कीमत ईमानदारी से मिलनी चाहिए, न कि उसे ठुकराया जाए।
खुले में पेशाब पर कार्रवाई का विवाद
बीते साल 29 जुलाई को रिंकू सिंह राही ने शाहजहांपुर के पुवायां तहसील का कार्यभार संभाला था। चार्ज लेने के बाद उन्होंने तहसील परिसर में खुले में पेशाब कर रहे चार लोगों को उठक-बैठक लगाने की सजा दी थी, जिसमें एक अधिवक्ता का मुंशी भी शामिल था। इस बात को लेकर वकीलों ने विरोध किया था। एसडीएम राही ने स्पष्ट किया था कि खुले में पेशाब करना गलत है। विवाद बढ़ने पर उन्होंने खुद कान पकड़कर उठक-बैठक लगाई थी, जिससे मामला और गरमा गया था।
