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हसीना को मौत की सजा: बांग्लादेश में हिंसा की आशंका, चुनाव पर ग्रहण

By Nov 18, 2025

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को ढाका स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा मानवता के खिलाफ कथित अपराधों के लिए मौत की सजा सुनाए जाने के फैसले ने देश में राजनीतिक अस्थिरता और अनिश्चितता को गहरा कर दिया है। इस फैसले के साथ ही फरवरी में होने वाले संभावित चुनावों में बड़े पैमाने पर हिंसा की आशंका भी बढ़ गई है। हसीना के समर्थकों ने धमकी दी है कि यदि उनकी अवामी लीग पार्टी, जो कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी थी, को चुनावों से प्रतिबंधित रखा गया तो देश अशांति की आग में झुलस जाएगा। हसीना के अलावा पूर्व गृहमंत्री असद्दुजमां खान कमाल को भी मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने 78 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री की इस सजा का विरोध किया है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र किसी भी परिस्थिति में मृत्युदंड के खिलाफ है। वहीं, दूसरी ओर, देश में पीड़ितों के परिवारों की मांग है कि हसीना को तत्काल फांसी दी जाए।

हसीना पर पिछले वर्ष छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसात्मक कार्रवाई को लेकर मानवता के विरुद्ध कथित अपराधों के मामले में मुकदमा चलाया गया था। 2024 के विरोध प्रदर्शनों, जिनमें संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 1,400 लोगों की जान गई, ने पहले ही देश की आर्थिक प्रगति पर गंभीर असर डाला है। हसीना पर फैसला आने से पहले ही ढाका में राजनीतिक हिंसा का माहौल गरमाया हुआ था। हाल के दिनों में कई देसी बम फटने और दर्जनों बसों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। कथित तोड़फोड़ के आरोप में अवामी लीग के कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में भी लिया गया है।

हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने कहा है कि यदि उनकी पार्टी पर से प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो अवामी लीग के समर्थक राष्ट्रीय चुनाव रोक देंगे। उन्होंने बड़े पैमाने पर हिंसक विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दी है, जो 17 करोड़ की आबादी वाले देश को हिला सकता है। उन्होंने आशंका जताई है कि इससे वैश्विक ब्रांडों को कपड़ों के निर्यात में बाधा आ सकती है और 4.7 अरब डॉलर के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) बेलआउट पर निर्भर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था भी खतरे में पड़ सकती है। वाजेद ने कहा, “मेरी मां देश में हमारे पार्टी के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं। मैं भी उनसे संपर्क में हूं। देश में हमारे करोड़ों कार्यकर्ता और समर्थक हैं। वे बहुत गुस्से में हैं।”

शेख हसीना के सत्ता से बेदखल होने के बाद से भारत के साथ बांग्लादेश के संबंधों में भी तनाव की स्थिति बनी हुई है। बांग्लादेश ने भारत से पूर्व प्रधानमंत्री को सौंपने का आग्रह किया है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बांग्लादेश के लोगों के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पड़ोसी देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव नहीं होते, वहां लोकतांत्रिक व्यवस्था और सुशासन की उम्मीद करना मुश्किल है।

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