‘एसआईआर के एग्जाम’ में हापुड़ अव्वल! 99.92% आवेदन हो चुके हैं जमा; फॉर्म भरने का काम अंतिम चरण में
हापुड़ जिले ने ‘एसआईआर के एग्जाम’ (Special Summary Revision) के लिए आवेदन करने में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। जिले में 99.92% आवेदन जमा हो चुके हैं, और फॉर्म भरने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। बीएलओ और मॉनिटरिंग में लगाए गए अधिकारियों ने घर-घर जाकर मतदाताओं से एसआईआर के फार्म भरवाकर जमा कराए हैं।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार शाम तक जिले में 99.92 प्रतिशत आवेदन भरकर जमा कर लिए गए थे। हालांकि इन फार्म को डिजिटल करने में जिला अभी पिछड़ा हुआ है। जिले में 77.14 प्रतिशत फार्म की ऑनलाइन किए गए हैं। इनमें भी करीब 20 प्रतिशत आवेदन को एडिट किया जाना है।
दरअसल, जिले की मेपिंग नहीं खुलने के कारण प्रारंभ में सभी बीएलओ ने एक ही ग्रुप में सभी आवेदन लागइन कर दिए थे। उसके बाद चुनाव आयोग से एडिट का ऑप्शन मिलने के बाद उनको संशोधित कराया जा रहा है। एसआईआर के आवेदन भरवाने और जमा कराने के लिए प्रशासन ने आमजन को जमकर जागरूक किया था। इसके लिए ग्राम पंचायतों से लेकर वार्ड तक में पब्लिक मीटिंग की गईं। वहीं सामाजिक संगठनों को साथ लेकर आमजन को जागरूक किया गया।
बीएलओ को दिनरात इस कार्य में लगाया गया। वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग करके जरूरी सहयोग लिया गया। एक ओर जहां प्रशासन की ओर से मुनादी-एनाउंसमेंट कराया गया। वहीं विभिन्न राजनीतिक व सामाजिक संगठनों द्वारा जागरूकता यात्रा व जागरूकता रथ से लोगों को समझाने का प्रयास किया गया। कुछ लोगों द्वारा एसआईआर को लेकर सामान्य लोगों में गलतफहमी पैदा करने का प्रयास किया गया। इसके लिए प्रशासन की ओर से लोगों को समझाया गया कि एसआईआर क्यों आवश्यक है।
प्रारंभ में एसआईआर के कार्य के लिए तीन चरण निर्धारित किए गए थे। पहले चरण में फार्म का घर-घर जाकर वितरण करना था। दूसरी बार में भरे हुए फार्म को वापस लेना था। वहीं मतदाता के नहीं मिलने पर तीसरी बार में फिर से उनके पास जाना था। हालांकि यह निर्णय व्यवहारिक साबित नहीं हो सका। मतदाताओं ने फार्म तो ले लिए, लेकिन उनको वापस जमा करने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। एक-एक परिवार में आठ से दस बार तक जाना पड़ा। उसके बाद ही फार्म जमा कराए जा सके। हालांकि कई लोगों ने फार्म जमा कराए ही नहीं हैं। उन्होंने समझाने के बावजूद फार्म पर हस्ताक्षर करने से ही इंकार कर दिया। यही कारण है कि 22.80 प्रतिशत मतदाताओं के आवेदन जमा ही नहीं हुए हैं।
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