हंसल मेहता ने बताई ‘दिल पे मत ले यार’ की कड़वी सच्चाई, कंगाल होकर पीते थे शराब
बॉलीवुड के जाने-माने निर्देशक हंसल मेहता, जिन्होंने ‘खाना खज़ाना’ जैसे टीवी शो से अपने करियर की शुरुआत की और ‘अलीगढ़’, ‘शाहिद’ व ‘स्कैम 1992’ जैसी सफल फिल्में दीं, आज अपने अतीत के एक ऐसे अध्याय को याद कर रहे हैं जो सफलता का नहीं, बल्कि संघर्ष का था। हाल ही में, उनकी फिल्म ‘दिल पे मत ले यार’ को रिलीज हुए 25 साल पूरे हुए हैं। मनोज वाजपेयी, तब्बू, सौरभ शुक्ला और आदित्य श्रीवास्तव जैसे सितारों से सजी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भले ही दम तोड़ दिया हो, लेकिन इसने निर्देशक के जीवन में एक ऐसा अंधेरा ला दिया था जिसकी कल्पना भी मुश्किल है।
मेहता ने इंस्टाग्राम पर फिल्म का पोस्टर साझा करते हुए एक मार्मिक पोस्ट लिखा, जिसमें उन्होंने खुलासा किया कि ‘दिल पे मत ले यार’ न केवल व्यावसायिक रूप से विफल रही, बल्कि इसने उन्हें जीवन के सबसे कठिन दौर में धकेल दिया। उन्होंने बताया कि किस तरह फिल्म की असफलता के कारण वे दिवालिया हो गए और शराब की लत से जूझने लगे।
अपने दिल को छू लेने वाले पोस्ट में, मेहता ने स्वीकार किया कि यह फिल्म, जिसकी शुरुआत एक बेहतरीन विचार के साथ हुई थी, दबाव में आकर किए गए समझौतों के कारण पटरी से उतर गई। उन्होंने लिखा, “मुझे याद आया कि ‘दिल पे मत ले यार’ आज से 25 साल पहले रिलीज हुई थी, और यह एक अजीब, खट्टा-मीठा एहसास है।”
उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे यह प्रोजेक्ट मूल रूप से सौरभ शुक्ला द्वारा लिखी गई एक तीक्ष्ण, मजाकिया और विद्रोही पटकथा से शुरू हुआ था। “लेकिन, निर्माताओं के दबाव के कारण, हमें बदलाव करने पड़े। यह विडंबना थी कि लालच के बारे में बनी एक फिल्म खुद लालच के कारण बर्बाद हो गई,” मेहता ने खुलासा किया। यह फिल्म न केवल व्यावसायिक रूप से असफल साबित हुई, बल्कि इसने निर्देशक के व्यक्तिगत जीवन पर भी गहरा नकारात्मक प्रभाव डाला, जिससे उन्हें आर्थिक तंगी और नशे की समस्याओं का सामना करना पड़ा। आज, 25 साल बाद, मेहता उस दौर को याद करते हुए फिल्म की विफलता के साथ-साथ अपनी व्यक्तिगत लड़ाइयों को भी स्वीकार कर रहे हैं।
