हल्द्वानी वासियों को रिंग रोड की सौगात, सीएम धामी ने 792 करोड़ की घोषणा से जगाई उम्मीद
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में विकास की नई उम्मीदें जगाते हुए शहर के लिए 792 करोड़ रुपये की लागत से रिंग रोड निर्माण की घोषणा की है। उन्होंने यह घोषणा एमबी इंटर कॉलेज मैदान में आयोजित सहकारिता मेले के दौरान की। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विकास परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि खेल विश्वविद्यालय की जमीन से जुड़ी बाधाएं जल्द दूर होंगी, राज्य कैंसर संस्थान का निर्माण प्रगति पर है और पंतनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का कार्य भी शीघ्र शुरू होगा।
सहकारिता मेले में मुख्यमंत्री ने पशुपालन और सब्जी उत्पादन में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता कल्याण योजना के तहत 16.97 करोड़ रुपये और एनआरएलएम स्वयं सहायता समूहों के अंतर्गत 75.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। उन्होंने बताया कि प्रदेश की 5,511 समितियों में से 3,838 का डेटा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पर अपलोड किया जा चुका है। फरवरी 2023 से अब तक 800 नई पैक्स, 248 नई डेयरी और 116 मत्स्य समितियां गठित की गई हैं। मिलेट मिशन के तहत मडुवा की खरीद दर बढ़ाकर 48.86 रुपये प्रति किलो कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में अवैध गतिविधियों पर सरकार की कड़ी कार्रवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लैंड जिहाद, लव जिहाद जैसी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई में 10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि मुक्त कराई गई है और 250 अवैध मदरसों को सील किया गया है। ऑपरेशन कालनेमि के माध्यम से सनातन संस्कृति के विरुद्ध पाखंड फैलाने वालों पर भी कठोर कार्रवाई की जा रही है।
एक पुराने वाकये का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्ची में नाम गलत लिखे होने के कारण वे पहले नाराज हो गए थे, लेकिन यह दिखाता है कि कैसे छोटी सी चूक भी बड़ी खबर बन जाती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अधूरे कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर इसी वित्तीय वर्ष में पूरा करें। उपनल कर्मियों की मांगों पर भी विचार किया जा रहा है, जिसमें 12 वर्ष से अधिक सेवा दे चुके कार्मिकों को समान वेतन देने पर सहमति बनी है।
मुख्यमंत्री ने नैनीताल में अधिकारियों के साथ एक बंद कमरे में बैठक भी की, जिसमें उन्होंने आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और उनका समाधान करने के निर्देश दिए। प्रदेश की कानून व्यवस्था को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया ताकि पर्यटक और श्रद्धालु देवभूमि में सुरक्षित महसूस कर सकें।
