गंगा जल की जांच करेगा जीएसवीएम, पानी की गुणवत्ता पर होगा विशेष focus
गंगा नदी के किनारे बसे उत्तर प्रदेश के दस जिलों के पानी की गुणवत्ता की जांच अब जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज करेगा। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सिफारिशों के आधार पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली ने जीएसवीएम को यह महत्वपूर्ण कार्य सौंपा है। इस परियोजना के लिए मेडिकल कॉलेज में एक विशेष प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जहाँ गंगा के जल में क्रोमियम और मर्करी जैसे खतरनाक रासायनिक तत्वों की विस्तृत जांच की जाएगी।
जीएसवीएम के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि इस अत्याधुनिक प्रयोगशाला की स्थापना के लिए लगभग 28.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। यह लैब न केवल गंगा के पानी की जांच करेगी, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के कुओं और तालाबों के जल का भी विश्लेषण करेगी। इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि पानी का मानव स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ रहा है। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में टीमें भी भेजी जाएंगी। इस प्रस्ताव को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और अपर निदेशक (स्वास्थ्य) को भेजा गया है।
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