ग्रेटर नोएडा में गौशालाएं बनीं कागजी, सड़कों पर घूमते पशुओं से दुर्घटना का खतरा
ग्रेटर नोएडा में आवारा पशुओं की समस्या विकट रूप धारण कर चुकी है। जिला प्रशासन और विभिन्न प्राधिकरणों ने करोड़ों की लागत से जिले भर में कुल 24 गौशालाएं स्थापित की हैं, जिनका उद्देश्य सड़कों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को आश्रय देना था। इनमें जिला प्रशासन की 18, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की दो, नोएडा प्राधिकरण की एक और यमुना विकास प्राधिकरण की तीन गौशालाएं शामिल हैं।
इसके बावजूद, शहर की मुख्य सड़कों, सर्विस रोड और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आवारा पशुओं के झुंड बेखौफ घूमते नजर आते हैं। इन पशुओं की मौजूदगी राहगीरों के लिए लगातार दुर्घटना का सबब बन रही है। खासकर रात के अंधेरे में वाहन चालकों को ये पशु अचानक सामने आ जाते हैं, जिससे वे या तो स्वयं दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं या फिर पशुओं को चोट पहुंचती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय निवासियों ने इस समस्या पर चिंता व्यक्त की है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “सड़कों पर दिन-रात आवारा पशुओं की मौजूदगी से दुर्घटना का खतरा बना रहता है। जिम्मेदार अधिकारियों को इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।”
एक सक्रिय नागरिक टीम के सदस्य ने सुझाव दिया कि पशुपालकों को अपने पशुओं को शाम ढलते ही यूं ही छोड़ देने की आदत पर अंकुश लगाना चाहिए। ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा, “अधिकारियों को नियमित रूप से इन आवारा पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। तभी इस समस्या का स्थायी समाधान निकल सकता है।”
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष ने भी सर्दियों के मौसम में इस समस्या के और गंभीर होने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा, “सर्दी के मौसम में रातें लंबी होती हैं और कोहरे की संभावना भी रहती है। ऐसे में आवारा पशुओं का सड़कों पर घूमना दुर्घटनाओं के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।”
आंकड़ों के बावजूद सड़कों पर पशुओं की बढ़ती संख्या यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर गौशालाओं में रखे गए पशु कहां हैं और उन पर खर्च होने वाले करोड़ों रुपये का प्रबंधन किस तरह हो रहा है। प्रशासन और प्राधिकरणों के बीच जिम्मेदारी की खींचतान के चलते यह गंभीर समस्या जस की तस बनी हुई है, जिससे आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
