आगरा में फर्जी बैनामों का खेल जारी, 30 लाख की जानकारी छिपाई
आगरा के उप निबंधक कार्यालयों में फर्जी बैनामों का गोरखधंधा अभी भी जारी है, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की जा रही जांच के बीच, आयकर विभाग की टीम ने हाल ही में किरावली उप निबंधक कार्यालय में एक सर्वे किया, जिसमें 30 लाख रुपये से अधिक के बैनामों की जानकारी छिपाए जाने का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह घटना सरकारी तंत्र में व्याप्त अनियमितताओं की ओर इशारा करती है।
सूत्रों के अनुसार, उप निबंधकों को सीधे आयकर विभाग को 30 लाख रुपये से अधिक के बैनामों की जानकारी देनी होती है, साथ ही दस्तावेजों की गहन जांच भी सुनिश्चित करनी होती है। हालांकि, स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (एसएफटी) की जानकारी नियमानुसार नहीं दी जा रही है। यह स्थिति केवल किरावली कार्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अन्य उप निबंधक कार्यालयों में भी यही हाल बताया जा रहा है। कुछ मामलों में तो 50 लाख रुपये से अधिक के बैनामों की सूचनाओं को भी दबाया जा रहा है।
तहसील सदर में स्थित 10 उप निबंधक कार्यालयों में से पांच इसी तहसील में हैं। इन कार्यालयों में प्रतिदिन औसतन 750 बैनामों का पंजीकरण होता है, जिससे विभाग को रोजाना 15 से 17 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। नियमों के अनुसार, किसी भी बैनामा में दो लाख रुपये से अधिक का नकद भुगतान स्वीकार नहीं किया जा सकता और पैनकार्ड अनिवार्य है। 30 लाख रुपये से अधिक के सभी बैनामों की एक सूची बनाई जाती है और साल में एक बार सभी उप निबंधकों को आयकर विभाग को एसएफटी के रूप में यह जानकारी देनी होती है, जिसमें क्रेता-विक्रेता का पूरा विवरण शामिल होता है।
यह खुलासा हुआ है कि कई सालों से जिले के अधिकांश उप निबंधक यह महत्वपूर्ण जानकारी आयकर विभाग को नहीं दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 50 लाख रुपये या एक करोड़ रुपये से अधिक के बैनामों की सूचना संबंधित अधिकारियों जैसे एडीएम वित्त एवं राजस्व, डीएम और सहायक महानिरीक्षक (एआइजी) निबंधन को समय पर नहीं भेजी जा रही है। कुछ मामलों में तो ऐसे बैनामों को जानबूझकर छिपाया जाता है।
इसी ढिलाई का फायदा फर्जी बैनामा गिरोह के सदस्य उठाते हैं। वे ऐसे बैनामों को बदलकर तहसील सदर स्थित रिकॉर्ड रूम में जमा कर देते हैं। इस तरह के गिरोह का पर्दाफाश जनवरी 2025 में भी हो चुका है, जो इस बात की पुष्टि करता है कि यह समस्या कितनी गहरी है। इस पूरे मामले से सरकारी राजस्व के नुकसान के साथ-साथ भूमि धोखाधड़ी की संभावनाओं पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
नुनिहाई इंडस्ट्रियल एरिया पर एलिवेटेड रोड का खतरा, कारोबारियों में आक्रोश
यमुना पर आगरा मेट्रो पुल का निर्माण फिर शुरू, काम में आएगी तेजी
आधार सेवा केंद्र 5 दिसंबर तक बंद, जानिए कार्ड बनवाने का विकल्प
पूर्व प्राचार्य डॉ. शुक्ला के खिलाफ मुकदमा दर्ज, दस्तावेज व चाबियां न सौंपने का आरोप
बहू के उकसाने पर बेटे ने की आत्महत्या, पिता ने ससुराल पक्ष पर लगाए गंभीर आरोप
दुबई-कंबोडिया के साइबर गैंग का पर्दाफाश, आगरा से आठ गिरफ्तार
ताजमहल के शहर में नए साल का जश्न: होटल इंडस्ट्री तैयार
GST बकाया वसूली का लक्ष्य: आगरा जोन में हर महीने 100 करोड़ रुपये वसूलने के निर्देश
