आगरा में 18.27 करोड़ का बोगस फर्मोंं द्वारा आईटीसी घोटाला उजागर
आगरा में राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) विभाग ने एक बड़े इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) घोटाले का खुलासा किया है, जिसमें 10 फर्जी फर्मों द्वारा 18.27 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई है। यह खुलासा एसजीएसटी की विशेष अनुसंधान शाखा द्वारा केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) में पंजीकृत फर्मों की गहन जांच के बाद हुआ है।
सूत्रों के अनुसार, इन फर्मों ने बिना किसी वास्तविक खरीद-फरोख्त या व्यापारिक गतिविधि के केवल कागजों पर कारोबार दिखाकर आईटीसी का अनुचित लाभ उठाया। जुलाई में मुख्यालय के निर्देश पर शुरू हुई जांच में पाया गया कि अधिकांश फर्मों ने आईटीसी का गलत इस्तेमाल किया है। हालांकि, महेश ट्रेडर्स और एसके संस नामक दो फर्मों ने आईटीसी का लाभ नहीं उठाया था।
जांच में शामिल अन्य आठ फर्मों, जिनमें हिमांशु इंटरप्राइजेज, जाधव ट्रेडर्स, दिनेश ट्रेडर्स, प्रकाश ट्रेडर्स, संकल्प ट्रेडिंग, सवराज ट्रेडर्स, मूनलाइट ट्रेडर्स और अंश ट्रेडर्स शामिल हैं, ने मिलकर 18.27 करोड़ रुपये की आईटीसी का गबन किया। फर्जीवाड़ा साबित होने पर एसजीएसटी विभाग ने धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों के प्रयोग के आरोप में लोहामंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर दी। पुलिस ने इस पर संज्ञान लेते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है।
अपर आयुक्त ग्रेड वन पंकज गांधी ने बताया कि इन बोगस फर्मों ने प्रदेश के बाहर अन्य राज्यों में पंजीकृत फर्मों को भी आईटीसी पास ऑन करके अनुचित लाभ पहुंचाया है। विभाग ने तत्काल प्रभाव से इन फर्मों की आईटीसी को ब्लॉक कर दिया है। वहीं, डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने पुष्टि की है कि इन फर्जी फर्मों के खिलाफ कुल पांच मुकदमे दर्ज किए गए हैं और विवेचना जारी है।
यह पहली बार नहीं है कि इस तरह का घोटाला सामने आया है। नवंबर के पहले सप्ताह में भी एसजीएसटी की तहरीर पर लोहामंडी थाने में 15.38 करोड़ रुपये की फर्जी आईटीसी का मामला दर्ज किया गया था, जिसमें ओम ट्रेडर्स, श्रीराम ट्रेडर्स, आरएस ट्रेडर्स, बालाजी ट्रेडर्स, आकाश ट्रेडर्स, सिंह ट्रेडर्स और पीके ट्रेडर्स जैसी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी। ये सभी फर्म भी सीजीएसटी में पंजीकृत थीं।
आईटीसी का मतलब है कि एक फर्म अपनी खरीद पर चुकाए गए कर को अपनी बिक्री पर बनने वाले कर से समायोजित कर सकती है। उदाहरण के लिए, यदि किसी फर्म ने 100 रुपये के माल पर 18 रुपये कर चुकाया और उसे 200 रुपये में बेचा, जिस पर 36 रुपये कर बनता है, तो वह 36 रुपये के कर में से 18 रुपये का आईटीसी समायोजित कर सकती है। फर्जीवाड़े में, बिना वास्तविक आपूर्ति के केवल फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी का दावा किया जाता है।
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