गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: बिहार के चार गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेस वे परियोजना अब बिहार के पूर्वी चंपारण जिले में जमीन अधिग्रहण के महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुकी है। पताही प्रखंड के चार गांवों में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिससे प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, जिला भूअर्जन पदाधिकारी द्वारा सीओ, पताही को भेजे गए एक पत्र के बाद पूरे अंचल में जमीन की मापी और खेसरा पंजी तैयार करने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। इस एक्सप्रेसवे के निर्माण से क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। अधिकारियों की टीमें लगातार गांवों का दौरा कर रही हैं और ग्रामीणों के बीच इस परियोजना को लेकर उत्सुकता और चर्चा का माहौल है।
जिला भूअर्जन पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया है कि भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण, मोतिहारी के परियोजना निदेशक से प्राप्त अधियाचना के आधार पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। पत्र में विशेष रूप से मौजा बोकानेकला (थाना नंबर 211), मौजा परसौनी कपूर (थाना नंबर 212), मौजा रामपुर मनोरथ (थाना नंबर 213) और मौजा मुजिया (थाना नंबर 220) की जमीन को परियोजना के लिए चयनित किया गया है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा उपलब्ध कराए गए नक्शे और एलाइमेंट (संरेखण) का विस्तृत विवरण जिला भूअर्जन कार्यालय को सौंप दिया गया है। इसी आधार पर सीओ को खेसरा पंजी तैयार करने का निर्देश दिया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि अधिग्रहित होने वाली जमीन का सही विवरण प्रशासन को उपलब्ध हो सके, मौजावार बारीक सर्वे करना आवश्यक बताया गया है।
निर्देश मिलते ही, सीओ, पताही ने तत्काल कदम उठाते हुए तीन अंचल अमीनों की एक विशेष टीम गठित की है। इस टीम को एक सप्ताह की समय सीमा के भीतर चारों चयनित मौजा में सर्वे कर खेसरा पंजी तैयार करने का आदेश दिया गया है। अमीनों को यह स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे नक्शे के अनुसार जमीन का सटीक मापन करें और रिपोर्ट प्रस्तुत करें, ताकि भूमि अधिग्रहण की आगे की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी की जा सके।
ग्रामीणों में इस परियोजना को लेकर उत्साह है। उनका मानना है कि एक्सप्रेसवे के निर्माण से क्षेत्र में आवागमन की सुविधा में अभूतपूर्व सुधार होगा। इसके साथ ही, स्थानीय बाजारों के विस्तार, व्यवसाय और रोजगार के नए अवसरों के सृजन की भी उम्मीद जगी है, जिससे क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में सुधार होने की संभावना है। यह परियोजना पूर्वी चंपारण के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।
