गोरखपुर आयुष विश्वविद्यालय: आयुर्वेद में बी फार्मा और बीएससी नर्सिंग कोर्स शुरू, छात्रों को मिलेगा प्लेसमेंट का अवसर
गोरखपुर स्थित महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय ने आयुर्वेद के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए बी फार्मा और बीएससी नर्सिंग कोर्स शुरू किए हैं। सूत्रों के अनुसार, इन पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू हो गई है। विश्वविद्यालय का यह कदम आयुर्वेद शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
बी फार्मा कोर्स चार वर्ष का होगा, लेकिन डी फार्मा उत्तीर्ण छात्रों को सीधे दूसरे वर्ष में प्रवेश मिलेगा, जिससे उनका एक साल बचेगा। यह उन छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर है जो आयुर्वेद के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं। इसके अतिरिक्त, विदेशी छात्र भी इन कोर्सों में नामांकन करा सकते हैं, खासकर श्रीलंका, सिंगापुर, भूटान, वर्मा और नेपाल जैसे देशों के छात्रों के लिए, जहां आयुर्वेद का प्रचलन है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विज्ञान वर्ग में इंटरमीडिएट या उसके समकक्ष परीक्षा उत्तीर्ण छात्र-छात्राएं इन कोर्सों में नामांकन करा सकते हैं। सीटों की संख्या अभी निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन विश्वविद्यालय सभी योग्य छात्रों को प्रवेश देने का प्रयास करेगा। नामांकन के बाद, विश्वविद्यालय एक प्लेसमेंट सेल का गठन करेगा जो छात्रों को नौकरी दिलाने में मदद करेगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. के रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि अंतिम वर्ष की परीक्षा से पहले आयुर्वेदिक कंपनियों को बुलाकर छात्र-छात्राओं का साक्षात्कार कराया जाएगा, जिससे उन्हें पढ़ाई पूरी करते-करते नौकरी मिल सके। इसके अतिरिक्त, यदि कोई विद्यार्थी यहां नामांकन लेने के बाद अपने क्षेत्र के किसी महाविद्यालय से यह कोर्स करने की इच्छा प्रकट करेगा, तो उसे यह सुविधा देने की कोशिश की जाएगी।
बी फार्मा के साथ ही बीएससी नर्सिंग का कोर्स भी शुरू किया गया है। अभी तक आयुर्वेदिक अस्पतालों में मॉडर्न मेडिकल साइंस से बीएससी नर्सिंग कर चुकी स्टाफ नर्सों को तैनात किया जाता था, जिन्हें डेढ़-दो साल की ट्रेनिंग देनी पड़ती थी। अब आयुर्वेद में यह डिग्री हासिल बच्चे स्टाफ नर्स बन सकेंगे, जिससे उन्हें आयुर्वेदिक अस्पतालों में आसानी से नौकरी मिल जाएगी।
यह कदम न केवल छात्रों के लिए बल्कि आयुर्वेद के क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। विश्वविद्यालय औषधियों के निर्माण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है, जिसके लिए फार्मेसी में औषधि निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है।
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