गोरखपुर में सारसों की संख्या में आठ गुना वृद्धि, पक्षियों के लिए बना अनुकूल माहौल
गोरक्षनगरी की आबोहवा और जल स्रोतों ने पक्षियों के लिए स्वर्ग जैसा माहौल बना दिया है। गोरखपुर वन प्रभाग क्षेत्र में सारसों की संख्या में पिछले चार वर्षों में आठ गुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। वन विभाग द्वारा की गई तालाबों, पोखरों और नदियों की व्यापक सफाई के परिणामस्वरूप इन जल निकायों में मछलियों की बहुतायत हो गई है, जो पक्षियों के लिए भोजन का एक प्रमुख स्रोत है।
वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पहली बार वेटलैंड और सारस की गणना की गई थी, जिसमें वन प्रभाग क्षेत्र में मात्र 128 सारस पाए गए थे। इसके बाद, वेटलैंड्स को व्यवस्थित करने और शिकारियों पर सख्ती से लगाम लगाने के निर्देश दिए गए। वन विभाग ने सक्रियता दिखाते हुए सभी जल स्रोतों की सफाई सुनिश्चित की और वनकर्मियों को लगाकर शिकारियों पर कड़ी निगरानी रखी। इस प्रभावी कदम का परिणाम यह हुआ कि सारसों को एक सुरक्षित आश्रय मिला और उनकी संख्या में लगातार वृद्धि हुई।
आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2022 में यह संख्या बढ़कर 187 हो गई और 2025 की ग्रीष्मकालीन गणना में यह आश्चर्यजनक रूप से 879 तक पहुंच गई। वन विभाग दिसंबर में शीतकालीन सत्र की गणना कराने की तैयारी कर रहा है। परतावल, कैंपियरगंज और सहजनवा जैसे क्षेत्र सारसों के लिए विशेष रूप से उपयुक्त पाए गए हैं, जहाँ ये पक्षी सुबह-शाम अपने जोड़ों में देखे जा सकते हैं। वन विभाग की टीमें इन क्षेत्रों में नियमित गश्त कर इनकी गणना और निगरानी करती हैं।
सारस की प्रजाति के ही प्रवासी पक्षी, एशियन ओपनबिल भी इस क्षेत्र में आकर्षित हो रहे हैं। ये पक्षी मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाए जाते हैं और इनका प्रमुख भोजन भी मछली है। डीएफओ के अनुसार, सारस पक्षी की यह विशेषता है कि वे एक बार सुरक्षित महसूस करने पर उसी क्षेत्र में घोंसला बनाकर प्रजनन करते हैं, जिससे इनकी गिनती में आसानी होती है। राजकीय पक्षी सारस की बढ़ती संख्या को गोरखपुर वन प्रभाग के लिए एक सुखद संकेत माना जा रहा है, जो यहाँ की अनुकूल जलवायु और सुरक्षित वातावरण का प्रमाण है।
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