गोरखपुर में गैस सिलेंडर की किल्लत, 11 साल बाद फिर रात में लग रहीं लाइनें
गोरखपुर में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत ने उपभोक्ताओं का जीना दूभर कर दिया है। पिछले 11 सालों के बाद एक बार फिर लोगों को रात के अंधेरे में सड़क किनारे कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। ठंड के मौसम में इस तरह की परेशानी से लोगों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। आपूर्ति विभाग और कंपनी के अधिकारी भले ही आपूर्ति सामान्य होने का दावा करें, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
बड़हलगंज क्षेत्र में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। आकाश एचपी गैस, द्रौपदी एचपी गैस और दीपक गैस एजेंसी जैसी प्रमुख एजेंसियों पर गैस सिलेंडरों के लिए हाहाकार मचा हुआ है। ग्राहक रात में ही अपने सिलेंडरों के साथ लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं। आपूर्ति कभी होती है तो कभी नहीं। जिस दिन आपूर्ति होती भी है, उस दिन भी सैकड़ों की संख्या में ग्राहक बिना सिलेंडर लिए वापस लौटने को मजबूर होते हैं।
स्थानीय निवासियों रामदरश, लालबहादुर, शेषनाथ यादव, विनोद तिवारी, नित्यानंद सिंह, सुनीता देवी और मिथलेश कुमार ने बताया कि कई दिनों से सिलेंडर की दिक्कत चल रही है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति 2014 से पहले जैसी हो गई है, जब सिलेंडरों के लिए रात में गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगती थीं। इस किल्लत का फायदा उठाते हुए कालाबाजारी भी चरम पर है। सूत्रों के अनुसार, सिलेंडर खुले बाजार में 1500 से 1600 रुपये तक में बेचे जा रहे हैं, जो उपभोक्ताओं की जेब पर भारी पड़ रहा है।
मझगांवा और भटहट जैसे अन्य क्षेत्रों में भी यही हाल है। शिव शक्ति गैस एजेंसी पर दो दिनों में केवल एक ट्रक सिलेंडर की आपूर्ति हो रही है, जबकि मांग काफी अधिक है। एजेंसी के संचालक ने बताया कि बुकिंग के 10 दिन बाद ही सिलेंडर मिल पा रहा है। गजपुर बाजार और चरगांवा में भी हजारों उपभोक्ता सिलेंडर के इंतजार में परेशान हैं। प्रज्ञा गैस सर्विस एजेंसी के संचालक ने बताया कि बुकिंग के एक सप्ताह बाद सिलेंडर मिल रहा है, जिससे खासकर उन ग्राहकों को बहुत दिक्कत हो रही है जिनके घर में केवल एक ही सिलेंडर है। यह गंभीर समस्या प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग करती है।
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