गंगा एक्सप्रेसवे हादसे ने 9 साल के ओम को फिर किया अनाथ, बुआ भी नहीं रहीं
गंगा एक्सप्रेसवे पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने नौ साल के ओम कुमार की दुनिया उजाड़ दी है। उसकी मां के निधन के बाद जिन्होंने उसे ममता की छांव दी थी, वह बुआ रीनू भी इस हादसे का शिकार हो गईं। इस दुर्घटना ने ओम को फिर से अनाथ बना दिया है, और उसके माथे पर भविष्य की चिंता की गहरी लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं।
मूल रूप से चंदौसी के रहने वाले सचिन कुमार का पुत्र ओम कुमार जब चार साल का था, तब उसकी मां पिंकी का निधन हो गया था। मां के चले जाने के बाद बुआ रीनू ही उसके लिए सब कुछ बन गई थीं। रोहित की पत्नी रीनू, अपने बच्चों के साथ-साथ ओम का भी सहारा बनीं और उसे करीब तीन साल पहले अपने घर आदमपुर ले आईं। बुआ के स्नेह में ओम अपनी मां के गम को भूलने लगा था। बुआ ने उसे स्कूल में भी दाखिला दिलाया था, और वह कक्षा एक में पढ़ रहा था।
लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। गुरुवार को जब रोहित कुमार अपने तीन बच्चों को स्कूल से लेकर घर लौट रहे थे, तभी गंगा एक्सप्रेसवे पर एक भीषण हादसा हो गया। इस दुर्घटना में बुआ रीनू, उनकी बेटी रिया (कक्षा तीन) और बेटे भास्कर (कक्षा दो) की मौत हो गई। ओम की किस्मत अच्छी रही कि उसे कार में सफर के दौरान उल्टी आने की आदत के कारण बुआ उसे घर पर ही छोड़ गई थीं। हालांकि, उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि यह घर पर छोड़ा जाना हमेशा के लिए होगा।
इस हादसे में ओम के फुफेरे भाई जय कुमार (कक्षा पांच) और पिता रोहित कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। फिलहाल दोनों का मुरादाबाद के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है, जहां उनकी हालत में कुछ सुधार बताया जा रहा है। पिता-पुत्र को अभी तक अपने बाकी परिवार के दुनिया से चले जाने की जानकारी नहीं है।
इस हृदय विदारक घटना से पूरा गांव गमगीन है। नौ साल का ओम, जो पहले ही मां का साया खो चुका था, अब बुआ को खोने के गम में डूबा हुआ है। वह अपनी बुआ, फुफेरी बहन और भाई को याद कर बार-बार रो रहा है। लोगों का मानना है कि कार में उल्टी आने की आदत ने ही शायद ईश्वर ने उसकी जान बचाई है, वरना वह भी इस हादसे का शिकार हो जाता। ओम को अब एक सहारे की सख्त जरूरत है, ताकि वह इस असहनीय दुख से उबर सके और एक सामान्य जीवन जी सके।
