गंडक नदी के तटबंधों की सुरक्षा: बाढ़ से लाखों लोगों को मिलेगी राहत
पश्चिम चंपारण से प्राप्त समाचार के अनुसार, गंडक नदी के संवेदनशील तटबंधों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग और केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधानशाला, पुणे की एक उच्च-स्तरीय संयुक्त टीम ने शनिवार देर शाम बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य नदी के किनारों को सुरक्षित करने के लिए भेजे गए प्रस्तावों का मूल्यांकन करना था।
निरीक्षण दल में केंद्रीय जल आयोग के प्रतिनिधि शेर सिंह और अनुसंधानशाला पुणे के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल थे। बिहार की ओर से अभियंता प्रमुख वरुण सिंह और उत्तर प्रदेश की ओर से मुख्य अभियंता विकास सिंह ने दल का नेतृत्व किया। इस दौरान, स्थानीय चुनौतियों से टीम को अवगत कराने के लिए गोरखपुर के चीफ इंजीनियर भी मौजूद रहे।
टीम ने विशेष रूप से उन संवेदनशील क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जहां नदी कटाव से बचाव के लिए तत्काल मरम्मत और सुदृढ़ीकरण की आवश्यकता है। बगहा अनुमंडल के मधुबनी क्षेत्र में गदियानी टोला और रंगललही में कटाव को रोकने वाली ठोकरों की मरम्मत की जाएगी। ठकराहा क्षेत्र में हरखटोला, बररिया और चंदरपुर में मौजूदा ठोकरों को दुरुस्त किया जाएगा, जो मानसून के दौरान अत्यधिक दबाव में रहते हैं। उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में धूमनगर लक्ष्मीपुर और चैनपट्टी में महत्वपूर्ण बांधों को मजबूत किया जाएगा।
निरीक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए अभियंता प्रमुख वरुण सिंह ने कहा कि देर शाम तक चला निरीक्षण यह दर्शाता है कि अधिकारी बाढ़ सुरक्षा कार्यों को लेकर कितने गंभीर हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्रीय जल आयोग और अनुसंधानशाला की सहमति से इन महत्वपूर्ण कार्यों को मानसून से पहले शुरू कर दिया जाएगा। इससे बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों निवासियों को संभावित बाढ़ के खतरे से बड़ी राहत मिलेगी। यह पहल गंडक बेसिन की दीर्घकालिक बाढ़ सुरक्षा योजना का एक अभिन्न अंग है, जिसका उद्देश्य नदी के किनारे बसे समुदायों को सुरक्षित रखना है।
