गंभीर की रणनीति पर सवाल: ऑलराउंडरों पर अति-भरोसा टीम को ले डूबा?
घरेलू मैदान पर लगातार हार का सामना कर रही भारतीय क्रिकेट टीम की रणनीति पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कोच गौतम गंभीर के 18 महीने के कार्यकाल में टीम को कई निराशाजनक हारें मिली हैं, और हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू श्रृंखला में मिली हार ने इस स्थिति को और गंभीर बना दिया है। सूत्रों के अनुसार, टीम प्रबंधन की ऑलराउंडरों पर अत्यधिक निर्भरता और लाल गेंद की क्रिकेट के लिए टी-20 की तर्ज पर टीम चयन की रणनीति को हार का मुख्य कारण माना जा रहा है।
गंभीर, जिन्होंने अपनी कोचिंग में कोलकाता नाइटराइडर्स को आईपीएल में चैंपियन बनाया था, अब टेस्ट क्रिकेट में टीम चयन को लेकर आलोचनाओं के घेरे में हैं। उनकी कोचिंग में भारत ने घर पर खेले आठ टेस्ट मैचों में से चार गंवा दिए हैं। पिछले साल बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतकर अच्छी शुरुआत के बावजूद, न्यूजीलैंड ने भारत को उसके घर पर पहली बार 0-3 से करारी हार दी थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी 1-3 से हारना और इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज 2-2 से ड्रॉ कराना भी टीम के प्रदर्शन पर सवाल खड़े करता है।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वर्तमान श्रृंखला में, विशेष रूप से घरेलू परिस्थितियों और मनचाही पिचों के बावजूद, टीम का प्रदर्शन चिंताजनक रहा है। टीम प्रबंधन ने टेस्ट स्पेशलिस्ट के बजाय ऑलराउंडरों को प्राथमिकता दी, जिसके परिणामस्वरूप बल्लेबाजी क्रम में अस्थिरता देखने को मिली। जहां कभी राहुल द्रविड़ और चेतेश्वर पुजारा जैसे क्लासिक बल्लेबाज खेलते थे, वहीं अब वॉशिंगटन सुंदर जैसे ऑलराउंडरों को तीसरे नंबर पर उतारा जा रहा है। शुभमन गिल, केएल राहुल, और ध्रुव जुरैल जैसे बल्लेबाजों का प्रदर्शन भी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। पांचवें नंबर पर भी ऋषभ पंत, ध्रुव जुरैल और रवींद्र जडेजा के बीच लगातार बदलाव देखे गए हैं, जो टीम में स्थायित्व की कमी को दर्शाता है।
ऑलराउंडरों पर फोकस केवल रन बनाने में ही समस्या नहीं पैदा कर रहा, बल्कि विकेट लेने में भी बाधा उत्पन्न कर रहा है। 2013 से 2023 तक, रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की स्पिन जोड़ी ने घरेलू पिचों पर विकेटों की झड़ी लगाकर भारत की कई जीतें सुनिश्चित की थीं। लेकिन अब, वॉशिंगटन सुंदर को प्राथमिकता देने के कारण, अश्विन जैसे अनुभवी गेंदबाज को पर्याप्त मौके नहीं मिल पा रहे हैं, और उन्होंने बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बीच में संन्यास की घोषणा कर दी थी। यह रणनीति टीम के संतुलन को बिगाड़ रही है और क्रिकेट के सबसे बड़े प्रारूप में भारत के भविष्य पर चिंताएं बढ़ा रही है।
