उत्तराखंड शिक्षा विभाग में सुगम-दुर्गम ट्रांसफर का खेल: हाई कोर्ट ने उठाए सवाल
उत्तराखंड शिक्षा विभाग में सुगम-दुर्गम स्थानांतरण वर्गीकरण को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। दशकों से दुर्गम क्षेत्रों में तैनात शिक्षक सुगम क्षेत्रों में नहीं आ पा रहे, जबकि सुगम में जमे शिक्षकों का स्थानांतरण नहीं हो रहा। यह स्थिति तब है जब हाई कोर्ट ने इस मामले में गंभीर टिप्पणी की है।
हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि शून्य स्थानांतरण उन कार्मिकों को प्रभावित कर सकता है जो कठिन क्षेत्रों में तैनात हैं और सुगम क्षेत्रों में जाना चाहते हैं। यह उन लोगों के लिए एक छिपा हुआ आशीर्वाद है जो पहले से ही सुगम क्षेत्रों में तैनात हैं और दूरदराज के क्षेत्रों में ड्यूटी करने से बच रहे हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि विभाग को स्थानांतरण अधिनियम लागू करने, विशेष रूप से सुगम और दुर्गम के वर्गीकरण के आधार पर स्थानांतरण में उम्मीदवारों के अंकों की गणना में समस्या आ रही है।
एक ही गांव के स्कूलों का अलग वर्गीकरण
उत्तरकाशी के पुरोला के एक शिक्षक की याचिका ने इस धांधली को पूरी तरह उजागर कर दिया। इसमें एक ही गांव में स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय को क्रमशः ‘सुगम’ और ‘दुर्गम’ के रूप में गलत तरीके से वर्गीकृत किया गया था। कोर्ट ने ऐसे वर्गीकरण के आधार पर किसी भी कर्मचारी के स्थानांतरण पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानांतरण सेवा की एक आवश्यकता है और विशेष परिस्थितियों में सुगम-दुर्गम वर्गीकरण के अलावा भी स्थानांतरण किया जा सकता है।
स्थानांतरण अधिनियम और वर्गीकरण के मानक
शिक्षा विभाग ने वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम-2017 के तहत विद्यालयों के कोटिकरण के संबंध में मानकों के आधार पर विद्यालयों का सुगम-दुर्गम में वर्गीकरण शुरू किया था। इसमें कार्यस्थल की पैदल दूरी, सड़क मार्ग की सुविधाएं, चिकित्सा सुविधाएं, बच्चों के लिए शिक्षण संस्थाएं, व्यावसायिक सेंटर या बाजार की सुविधाएं, समुद्र तल से ऊंचाई, रेलवे स्टेशन से कार्यस्थल की दूरी आदि को गुणांक तय किए गए थे। प्रत्येक विभाग में जिला से ग्राम स्तर की तैनाती के लिए डीम की अध्यक्षता में गठित कमेटी तथा जिला, तहसील व ब्लाक मुख्यालय, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत क्षेत्र के कार्मिकों की तैनाती के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में सुगम-दुर्गम चिन्हीकरण करने का प्रावधान था।
विभाग की कार्रवाई जारी
हाई कोर्ट द्वारा सवाल उठाए जाने के बावजूद, नैनीताल जिले में शिक्षा विभाग ने नौ विद्यालयों को सुगम से दुर्गम श्रेणी में शामिल कर दिया है। सीईओ द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को निदेशालय को भेजा गया है, जिसमें जीआइसी बानना, जीआइसी जंगलियागांव, जीआइसी ओखलढूंगा, जीआइसी पटवाडांगर, जीजीआइसी भीमताल, जीआइसी क्वारब, जीआइसी ढोकाने, जीआइसी जौरासी व जीआइसी भींड़ापानी शामिल हैं। ये कॉलेज अब दुर्गम श्रेणी में आएंगे। इस तरह के वर्गीकरण से शिक्षकों के स्थानांतरण पर सीधा असर पड़ता है, जिससे उनके सेवा जीवन में अनिश्चितता बनी रहती है।
