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गेमिंग एप के जरिए आतंकी फंडिंग: केंद्र ने SC में दाखिल किया हलफनामा

By Nov 27, 2025

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि गैर-विनियमित ऑनलाइन गेमिंग एप्स का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गंभीर गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इस चिंता को देखते हुए, सरकार ने इन वर्चुअल प्लेटफार्मों को विनियमित करने के लिए कानून लाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का प्रयास करने की बात कही है। सरकार द्वारा दायर हलफनामे में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि ऑनलाइन मनी गेमिंग का अनियंत्रित विस्तार वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग, कर चोरी और कुछ मामलों में आतंकी फंडिंग से जुड़ा हुआ है। इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्र की अखंडता के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी बताया है कि ऑनलाइन गेमिंग का विपणन अक्सर बड़े पैमाने पर विज्ञापन अभियानों, मशहूर हस्तियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के समर्थन से किया जाता है। इससे विशेष रूप से युवाओं और कमजोर समूहों के बीच इनकी पहुंच और प्रभाव काफी बढ़ जाता है, जो चिंता का विषय है।

सरकार ने तर्क दिया है कि व्यक्तियों, परिवारों, समाज और देश पर ऑनलाइन मनी गेमिंग के हानिकारक और नकारात्मक प्रभावों को देखते हुए, ‘ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन अधिनियम, 2025’ लाया गया है। सरकार की यह भी चिंता है कि ऑनलाइन मनी गेमिंग अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तहत काम करती है और अक्सर इसे अन्य देशों से संचालित किया जाता है, जिससे विनियमन और नियंत्रण और भी जटिल हो जाता है।

पूर्ण प्रतिबंध को उचित ठहराते हुए, सरकार ने अदालत को बताया कि ऑनलाइन मनी गेम की पेशकश करने वाली कंपनियों के कारण आम लोगों को प्रति वर्ष लगभग 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। साथ ही, लगभग 45 करोड़ व्यक्ति सीधे तौर पर ऑनलाइन मनी गेम से प्रभावित हुए हैं। यह आंकड़ा ऑनलाइन गेमिंग के व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को दर्शाता है।

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