गाजियाबाद में 5जी कनेक्टिविटी सुधार और 6जी पर शोध शुरू, नौ देशों के इंजीनियर जुटे
गाजियाबाद के प्रतिष्ठित एडवांस लेवल टेलीकॉम ट्रेनिंग सेंटर (एएलटीटीसी) में सोमवार से 5जी कनेक्टिविटी को निर्बाध बनाने और भविष्य की 6जी सेवा की नींव रखने के लिए महत्वपूर्ण शोध कार्य प्रारंभ हो गया है। इस पहल के तहत, नौ विभिन्न देशों के इंजीनियरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे अपने-अपने देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बना सकें और संचार सुरक्षा को सुदृढ़ कर सकें।
भारत में 5जी सेवा अब आम लोगों तक पहुँच चुकी है, परंतु कुछ क्षेत्रों में, विशेषकर दूर-दराज के इलाकों में, उपभोक्ताओं को अभी भी 4जी जैसी कनेक्टिविटी का अनुभव हो रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए एएलटीटीसी के विशेषज्ञ इंजीनियर गहन शोध करेंगे। उनका लक्ष्य उन मूल कारणों का पता लगाना है जो 5जी सिग्नल की निर्बाध उपलब्धता में बाधा डाल रहे हैं। शोध के निष्कर्षों को मंत्रालय को रिपोर्ट के रूप में सौंपा जाएगा, ताकि स्थायी समाधान निकाला जा सके।
इसके समानांतर, भारत में 6जी इंटरनेट सेवा की शुरुआत के लिए भी शोध कार्य जारी रहेगा। ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है, जहाँ 6जी के लिए स्वदेशी तकनीक और उपकरणों का उपयोग किया जाएगा, जिसमें ‘मेक इन इंडिया’ पहल का विशेष ध्यान रखा जाएगा। विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की यह एक महत्वाकांक्षी योजना है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में लाओस, बांग्लादेश, कंबोडिया, मंगोलिया, म्यांमार, नेपाल, थाईलैंड, तुवालु और वियतनाम जैसे देश शामिल हैं। रविवार देर रात इन सभी देशों के इंजीनियरों का गाजियाबाद आगमन हुआ। यह प्रशिक्षण एएलटीटीसी के सीजीएम डॉ. मनीष शुक्ला के नेतृत्व में संपन्न होगा।
शोध का एक प्रमुख पहलू सुरक्षित संचार व्यवस्था को सुनिश्चित करना है। इसमें संदेशों और डेटा को बिना किसी बदलाव, चोरी या छेड़छाड़ के एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना शामिल है। हैकिंग, डेटा चोरी, और संदेशों की प्रामाणिकता को सत्यापित करने जैसी चुनौतियों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, रेलवे संचार, बिजली ग्रिड और रक्षा संचार प्रणालियों की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी इंजीनियर शोध करेंगे।
संचार व्यवस्था में रेडियो फ्रीक्वेंसी स्पेक्ट्रम का महत्वपूर्ण योगदान है, जिसका उपयोग मोबाइल नेटवर्क, वाई-फाई, सैटेलाइट और एयर ट्रैफिक नियंत्रण में होता है। गैर-लाइसेंस प्राप्त फ्रीक्वेंसी का अवैध उपयोग सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा करता है। इस पर अंकुश लगाने के लिए स्पेक्ट्रम मॉनिटरिंग तकनीकों को बेहतर बनाने पर भी शोध किया जाएगा, ताकि अवैध ट्रांसमीटरों और जैमर जैसी संदिग्ध गतिविधियों का पता लगाया जा सके। यह शोध भारत को वैश्विक दूरसंचार परिदृश्य में एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
