गाजियाबाद बना देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर, AQI 415 पार
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण शहर, गाजियाबाद, वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। सोमवार को शहर का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 396 दर्ज किया गया, जिसने इसे देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना दिया। नोएडा 397 AQI के साथ पहले स्थान पर रहा। विशेष रूप से, गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर सबसे अधिक चिंताजनक पाया गया, जहां AQI 415 तक पहुंच गया। यह आंकड़ा हवा की गुणवत्ता के बेहद खराब होने का संकेत देता है, जो निवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।
पिछले तीन दिनों से गाजियाबाद का AQI लगातार 400 के पार बना हुआ है। इस विकट स्थिति ने विशेष रूप से श्वसन संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए जीवन को और अधिक कठिन बना दिया है। शहर के विभिन्न निगरानी स्टेशनों में से, लोनी के अलावा, वसुंधरा क्षेत्र में भी AQI 403 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। संजयनगर में AQI 371 रहा, जबकि इंदिरापुरम का डेटा अपडेट नहीं हो सका। सुबह के समय घना कोहरा छाया रहा, जिसने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया।
प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सरकारी प्रयासों के बावजूद, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट पर प्रभावी निगरानी का अभाव बना हुआ है। बस स्टॉप और औद्योगिक क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही से उड़ने वाली धूल प्रदूषण को बढ़ा रही है। नगर निगम द्वारा सड़कों पर पानी का छिड़काव कर धूल को नियंत्रित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन यह अपर्याप्त साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों को भी धूल नियंत्रण के उपाय अपनाने के निर्देश दिए हैं।
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी अंकित सिंह ने बताया कि संबंधित विभागों को लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “विभाग स्तर पर भी मॉनिटरिंग की जा रही है और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जा रहा है।” हालांकि, इन दावों के बावजूद, शहर में प्रदूषण का स्तर लगातार उच्च बना हुआ है, जिससे नागरिकों में चिंता व्याप्त है। आवश्यक है कि प्रशासन प्रदूषण हॉटस्पॉट पर कड़ी निगरानी रखे और प्रभावी नियंत्रण उपाय लागू करे ताकि गाजियाबाद के निवासियों को स्वच्छ हवा मिल सके।
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