मुफ्त जांच, मुफ्त दवाएं, फिर भी ताले में बंद ‘आरोग्य मंदिर’: मरीजों की ‘नो एंट्री’ की हकीकत
सरकार ने इलाज के अभाव में किसी मरीज की मृत्यु न हो और उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई जा सके, इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 158 आयुष्मान आरोग्य मंदिर खुलवा रखे हैं। इन मंदिरों पर इलाज के लिए हर आरोग्य मंदिर पर सीएचओ (कम्यूनिटी हेल्थ आफिसर) संग एएनएम व आशा को तैनात कर रखा है।
आरोग्य मंदिर पर मरीज की डेंगू-मलेरिया, टीबी, यूरिन, टाइफाइड, शुगर, पीलिया, हेपेटाइटिस, बुखार आदि 14 प्रकार की जांच की मुफ्त सुविधा है। साथ ही दवाएं भी उपलब्ध करा रखी हैं। इन सभी आरोग्य मंदिरों पर सुबह नौ बजे से चार बजे तक मरीजों के उपचार के निर्देश हैं। स्वास्थ्य विभाग भी सभी आरोग्य मंदिरों पर सभी जांच व इलाज की दावेदारी कर रहा है।
दैनिक जागरण की टीम सोमवार को आरोग्य मंदिरों पर मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत जानने के लिए निकली। टीम ने 11 बजे कल्यानपुर के आरोग्य मंदिर पर पहुंचकर देखा तो उस पर ताला लटका मिला। वहां ग्रामीण दीपक कुमार, मानसिंह और राजीव सैनी ने बताया कि आरोग्य मंदिर पर सीएचओ नहीं आता, आए दिन बंद रहता है। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके बाद टीम 11.30 बजे डिडौली के आरोग्य मंदिर पहुंची। वहां देखा उस पर ताला लटका था। मरीज आशिया खांसी की दवा लेने आई थी। उसने बताया कि कई बार दवा लेने आ चुकी हूं। लेकिन हर बार मुझे आरोग्य मंदिर बंद मिला है। अहमद हसन, फरीद ने बताया कि सीएचओ कभी-कभी आकर आरोग्य मंदिर खोलते हैं।
सीएमओ डा. सत्यपाल सिंह ने बताया कि आरोग्य मंदिरों के एनक्वास में चयनित कराने की तैयारी चल रही है। जिसमें कुछ सीएचओ दूसरे आरोग्य मंदिरों पर जाकर सहयोग कर रहे हैं। अगर आरोग्य मंदिर नहीं खुल रहे तो जांच कराई जाएगी। आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को उच्चीकरण की कवायद चल रही है। जिसमें मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए 90 आरोग्य मंदिरों को एनक्वास (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स) में चयनित कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग जुटा हुआ है। एनक्वास में चयन होने पर सरकार की ओर से हर आरोग्य मंदिर को 1.26 लाख रुपये मुहैया कराए जाएंगे।
