घुसपैठियों के फर्जी पासपोर्ट: ATS ने तेज की जांच, UP की सुरक्षा पर बड़ा खतरा
प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि घुसपैठियों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिए हैं। आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) ने इस मामले में अपनी जांच को और तेज कर दिया है। विशेष रूप से अलीगढ़, सहारनपुर, बरेली, मेरठ, लखनऊ और कानपुर जैसे संवेदनशील जिलों में ऐसे घुसपैठियों की पहचान पर जोर दिया जा रहा है, जिन्होंने हाल के वर्षों में खाड़ी देशों की यात्राएं की हैं।
बांग्लादेशियों और रोहिंग्या को अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराने वाले सिंडिकेट के सदस्यों और उनके मददगारों की भी नए सिरे से छानबीन शुरू की गई है। एटीएस उन लोगों की तलाश कर रही है जो कूटरचित आधार कार्ड और अन्य फर्जी दस्तावेजों के जरिए घुसपैठियों को पासपोर्ट उपलब्ध कराने में मदद करते हैं।
हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में घुसपैठियों की पहचान और उन्हें वापस भेजने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था। इस योजना के तहत, घुसपैठियों की पहचान के लिए उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाएगा और उन्हें रखने के लिए डिटेंशन सेंटर स्थापित करने की प्रक्रिया भी जारी है। इन डिटेंशन सेंटरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, घुसपैठियों की विस्तृत बायोमेट्रिक प्रोफाइल तैयार करने की भी योजना है।
एटीएस ने लगभग दो साल पहले भी ऐसे ही एक सिंडिकेट के कई सदस्यों को गिरफ्तार किया था, जो घुसपैठियों को फर्जी दस्तावेज मुहैया कराते थे। उस समय यह भी पता चला था कि इस सिंडिकेट के तार दिल्ली और अन्य राज्यों से भी जुड़े हुए थे।
