फर्जी डिग्री मामला: JS यूनिवर्सिटी ने 11 डिग्रियां जारी करने से किया इंकार, मंगलायतन के मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव विनीत की तलाश जारी
फर्जी डिग्रियों के रैकेट का पर्दाफाश होने के बाद SIT की जांच में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। बुधवार को फरीदाबाद और हापुड़ की दो यूनिवर्सिटी द्वारा डिग्रियां जारी करने से इंकार करने के बाद अब फिरोजाबाद स्थित जेएस यूनिवर्सिटी ने भी अपने यहां से जारी की गई 11 डिग्रियों को फर्जी बताया है। इसके साथ ही, अलीगढ़ की मंगलायतन यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने फरार आरोपी विनीत के बारे में नई जानकारी दी है। प्रबंधन के अनुसार, विनीत कुछ साल पहले यूनिवर्सिटी के लिए मार्केटिंग का काम करता था। SIT अब उसकी तलाश में जुटी है और उसका डेटा खंगाला जा रहा है।
SIT की पांच टीमों ने मंगलवार को फरीदाबाद की लिंग्या, हापुड़ की मोनाड, अलीगढ़ की मंगलायतन, सहारनपुर की ग्लोकल और फिरोजाबाद की जेएस यूनिवर्सिटी में जांच पड़ताल की थी। लिंग्या और मोनाड यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने पहले ही अपने यहां से 100 और 3 डिग्रियां जारी होने की बात से साफ इंकार कर दिया था। अब जेएस यूनिवर्सिटी के इस खुलासे के बाद फर्जी डिग्रियों की संख्या बढ़कर 114 हो गई है। मंगलायतन और ग्लोकल यूनिवर्सिटी में जांच अभी जारी है।
फर्जी डिग्री के मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा के साथ जेल भेजे गए और फरार चल रहे अन्य आरोपियों के संबंध में भी SIT ने मंगलायतन यूनिवर्सिटी से पूछताछ की। विनीत, जो गाजियाबाद का रहने वाला बताया जा रहा है, की तलाश के लिए सर्विलांस टीम को उसकी डिटेल दे दी गई है। इसके अलावा, छतरपुर निवासी मयंक भारद्वाज, हैदराबाद निवासी मनीष उर्फ रवि, भोपाल निवासी शेखू और शुभम दुबे की तलाश में भी सर्विलांस टीम लगी हुई है।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब किदवई नगर पुलिस ने गौशाला चौराहे के पास शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन में छापा मारकर चार युवकों को फर्जी डिग्रियों के साथ गिरफ्तार किया था। यह गिरोह 2012 से सक्रिय था और इसके पास से 9 राज्यों की 15 यूनिवर्सिटी से जुड़ी 900 से ज्यादा डिग्री, माइग्रेशन और प्रमाण पत्र बरामद हुए थे। गिरोह का सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। SIT अब शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन के बैंक खातों में 2021 से 2025 के बीच हुए करीब सात करोड़ के ट्रांजेक्शन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि धनराशि कहां भेजी गई।
इस फर्जीवाड़े का खुलासा आम जनता के लिए चिंताजनक है, क्योंकि यह शिक्षा की गुणवत्ता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। इससे उन लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है जिन्होंने मेहनत से डिग्रियां हासिल की हैं।
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