बिना सहमति प्रीपेड हुए बिजली मीटर, नियामक आयोग ले जाने की तैयारी (prepaid meter news)
राज्य में लाखों बिजली उपभोक्ताओं के मीटरों को बिना उनकी सहमति के प्रीपेड मोड में बदलने का मामला गरमा गया है। उपभोक्ता परिषद ने इसे विद्युत अधिनियम और कनेक्शन की दरें तय करने वाले आदेशों का सीधा उल्लंघन बताया है। परिषद अब इस मामले को नियामक आयोग ले जाने की तैयारी कर रही है ताकि उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।
आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में अब तक 47.43 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना उनकी सहमति के प्रीपेड किए जा चुके हैं। इस बदलाव के कारण लगभग 31 लाख उपभोक्ताओं के मीटरों का बैलेंस नेगेटिव हो गया है, जिन पर कुल 1097 करोड़ रुपये का बकाया है। उपभोक्ता असमंजस में हैं कि उन्हें बिना किसी सूचना या सहमति के अचानक प्रीपेड व्यवस्था में क्यों डाल दिया गया।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत अधिनियम की धारा 47(5) उपभोक्ताओं को यह अधिकार देती है कि वे प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर में से किसी एक का चुनाव करें। उन्हें कोई बाध्य नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने आदेशों में उपभोक्ताओं के इस अधिकार को संरक्षित रखा है। परिषद इस मामले को नियामक आयोग के समक्ष रखेगी और उपभोक्ता अधिकारों पर सख्त आदेश जारी करने की मांग करेगी।
