अमेरिका में पढ़ाई का सपना जोखिम में: भारतीय छात्रों को ‘प्लान-बी’ की सलाह
अमेरिका में उच्च शिक्षा का सपना देख रहे भारतीय छात्रों के लिए वहां की परिस्थितियां लगातार कठिन होती जा रही हैं। ट्रंप प्रशासन की सख्त वीजा और इमिग्रेशन नीतियों के कारण अब अमेरिकी शिक्षा विशेषज्ञ भी छात्रों को वैकल्पिक गंतव्यों पर विचार करने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि “एक देश-एक मंजिल” का दृष्टिकोण अब व्यावहारिक नहीं रहा, और छात्रों को बहु-विकल्पीय, किफायती और सुरक्षित शिक्षा मॉडल अपनाने की आवश्यकता है।
एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष माइकल एम क्रो ने बताया कि अमेरिका आज भी आर्थिक रूप से मजबूत है और एआई, ईवी जैसी तकनीकों में भारी निवेश कर रहा है। इसके बावजूद, वीजा, शिक्षा के बाद नौकरी और इमिग्रेशन नीतियों को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है। यह स्थिति केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यूके, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए नियम सख्त हुए हैं।
ऐसे में, मौजूदा हालात में विकल्प सबसे अहम है। यदि किसी छात्र को अमेरिका का वीजा नहीं मिल पाता, तो उसके पास यूके या किसी अन्य देश का मजबूत विकल्प होना चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए अब दो-देशीय और दो-डिग्री मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस मॉडल में छात्र शुरुआती वर्ष भारत जैसे देश में पढ़ाई करते हैं और बाद के वर्ष अमेरिका या ब्रिटेन में। इससे न केवल शिक्षा की लागत घटती है, बल्कि वीजा और नीतिगत जोखिम भी कम होते हैं।
‘ओपन डोर्स 2024’ रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में लगभग 3.30 लाख भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ रहे थे। हालांकि, हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि वीजा रद्द करने के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई है। एक साल से भी कम समय में एक लाख से अधिक वीजा रद्द किए गए, जिनमें लगभग आठ हजार स्टूडेंट परमिट भी शामिल थे। शिक्षा के बाद नौकरियों के अवसर भी ट्रंप प्रशासन की सख्ती के चलते कम हो रहे हैं। यह स्थिति भारतीय छात्रों के भविष्य के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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