ठंड और प्रदूषण की दोहरी मार, बिहार में सांस लेना हुआ मुश्किल; अस्पतालों में बढ़े COPD के मरीज
बिहार में मौसम के बदलते तेवर और वायु प्रदूषण की बढ़ती समस्या ने लोगों की सेहत पर दोहरी मार डाली है। वायरल बुखार के मामलों में तेजी के साथ ही खांसी, गले में जलन और बलगम की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि वायरल संक्रमण से उबरने के बाद भी खांसी अब पहले की तुलना में ज्यादा दिनों तक बनी रह रही है।
आइजीआइएमएस के टीबी व चेस्ट विभाग की ओपीडी में रोजाना आने वाले मरीजों में करीब एक तिहाई ऐसे ही मामले हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष शंकर बताते हैं कि ठंड और प्रदूषण के कारण सीओपीडी (क्रानिक आब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) और दमा रोगियों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। ऐसे मरीजों को सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न और लगातार खांसी की समस्या ज्यादा दिनों तक बनी रहती है।
डॉक्टरों के अनुसार, वायरल इंफेक्शन के बाद श्वसन तंत्र में सूजन रह जाती है। इसी बीच जब मरीज प्रदूषण विशेषकर धूल, स्माग व वाहन धुएं में मौजूद सूक्ष्म कणों के संपर्क में आते हैं, तो यह सूजन बढ़ जाती है और खांसी हफ्तों तक बनी रहती है। प्रदूषण के कण वायु मार्ग की आंतरिक परत को क्षतिग्रस्त कर देते हैं, जिससे सांस नली की संवेदनशीलता बढ़ जाती है। ऐसे हालात में वायरल संक्रमण से उबरने के बाद भी शरीर सामान्य अवस्था में जल्दी नहीं लौट पाता। यह प्रभाव विशेष रूप से बुजुर्गों और पहले से दमा या सीओपीडी से पीड़ित लोगों में और गंभीर पाया गया है।
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