NCR के इस शहर में गंदा पानी बन रहा मौत का सबब, 65 हजार लोग बीमार; Health Alert जारी
गौतमबुद्धनगर में दूषित पानी की सप्लाई एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुकी है। पिछले डेढ़ वर्षों में, 65,000 से अधिक लोग हेपेटाइटिस, टाइफाइड, पीलिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। सेक्टर-22 चौड़ा गांव, खोड़ा कॉलोनी, छिजारसी जैसे कई क्षेत्रों में आज भी गंदे पानी की आपूर्ति जारी है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य खतरे में है।
स्वास्थ्य विभाग ने इस समस्या पर संज्ञान लेते हुए जिले भर में 45 से अधिक जांच शिविर लगाए और लगभग 42 हजार लोगों के स्वास्थ्य की जांच की। इस दौरान 39 हजार लोगों को ओआरएस के पैकेट और दवाएं वितरित की गईं।
विशेषज्ञों की चेतावनी
चाइल्ड पीजीआई के विशेषज्ञ डॉ. सुशील कुमार के अनुसार, मानसून के दौरान दूषित पानी पीने से बच्चों में हेपेटाइटिस-ए के मामले बढ़ जाते हैं। पीजीआई की ओपीडी में हर महीने 450 से 500 ऐसे मरीज पहुंचते हैं। मेदांता अस्पताल के डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन डॉ. जीसी वैष्णव और फोर्टिस अस्पताल के चेयरमैन इंटरनल मेडिसिन डॉ. अजय अग्रवाल ने बताया कि दूषित पानी से होने वाली बीमारियों में डिहाइड्रेशन, किडनी फेलियर, लिवर डैमेज और यहां तक कि मौत का भी खतरा रहता है। टाइफाइड, हैजा और हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां गंभीर रूप ले सकती हैं।
दीर्घकालिक खतरे
यथार्थ अस्पताल के डॉ. प्रखर गर्ग ने चिंता जताई कि दूषित पानी में आर्सेनिक और लेड जैसे भारी तत्व होते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर कैंसर और किडनी फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर भी इसका बुरा असर पड़ता है। उन्होंने इसे व्यवस्था की कमजोरी का परिणाम बताया, जिसमें सीवर का रिसाव और पाइपलाइनों में गंदगी प्रमुख कारण हैं।
