धर्म-क्षेत्र की दीवारें तोड़, तीन परिवारों ने बचाई तीन जिंदगियां
नई दिल्ली। इंसानियत और आपसी सहयोग की भावना ने एक बार फिर धर्म और क्षेत्र की दीवारों को तोड़कर अपनी श्रेष्ठता साबित की है। साकेत स्थित एक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में तीन ऐसे परिवारों ने एक-दूसरे की मदद के लिए हाथ बढ़ाया, जो पहले कभी एक-दूसरे से मिले भी नहीं थे। इन परिवारों ने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आपसी सहयोग और विश्वास का परिचय देते हुए जीवनदान का अनूठा उदाहरण पेश किया।
यह मामला थ्री-वे पेयर्ड किडनी ट्रांसप्लांट का है, जिसमें एक ही दिन में कुल छह लोगों की सर्जरी की गई। इस जटिल प्रक्रिया के माध्यम से किडनी फेल्योर से जूझ रहे तीन मरीजों की जान बचाई गई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, रानीगंज (पश्चिम बंगाल) के शादाब अली, हरि नगर (नई दिल्ली) के जोगिंदर कुमार और ओबरा (बिहार) के विनोद कुमार गंभीर किडनी रोग से पीड़ित थे और डायलिसिस पर थे।
तीनों मरीजों के परिवार के सदस्य किडनी दान करने के लिए तैयार थे, लेकिन ब्लड ग्रुप मैच न होने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसी स्थिति में, परिवारों के बीच पेयर्ड किडनी ट्रांसप्लांट की सहमति बनी। इस समझौते के तहत, किडनी का आदान-प्रदान किया गया। शादाब की पत्नी सिमरन परवीन की किडनी जोगिंदर कुमार को, जोगिंदर की बहन सुमन की किडनी विनोद कुमार को, और विनोद की पत्नी पूनम देवी की किडनी शादाब अली को लगाई गई।
मेडिकल क्षेत्र के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होने के साथ-साथ आपसी एकता और सहानुभूति का भी एक शानदार उदाहरण रहा। रीनल ट्रांसप्लांट एंड रोबोटिक्स के चेयरमैन डॉ. अनंत कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने 18 सितंबर को सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे के बीच यह चुनौतीपूर्ण सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की। एक सप्ताह के भीतर, जैसे-जैसे मरीज ठीक होते गए, उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलती गई। वर्तमान में सभी दानकर्ता और प्राप्तकर्ता पूरी तरह स्वस्थ हैं।
नेफ्रोलॉजी एंड रीनल ट्रांसप्लांट मेडिसिन के ग्रुप चेयरमैन डॉ. दिनेश खुल्लर ने बताया कि कई बार ब्लड ग्रुप मिसमैच या अन्य चिकित्सीय कारणों से परिवार का सदस्य किडनी दान नहीं कर पाता है। ऐसे मामलों में, पेयर्ड या स्वैप ट्रांसप्लांट एक बेहतर विकल्प होता है। इसमें अलग-अलग परिवार आपसी मेल के आधार पर डोनर का आदान-प्रदान कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि यह मामला इसका एक बेहतरीन उदाहरण है, जहां तीन परिवार मानवता के लिए एक साथ आए। एडवांस्ड एपीकेडी (Advanced Paired Kidney Donation) सॉफ्टवेयर की मदद से वैज्ञानिक सटीकता और पारदर्शिता के साथ सही दाता और प्राप्तकर्ता की पहचान करने में सफलता मिली।
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