धान में नमी की सीमा तय, किसानों को समय पर भुगतान के निर्देश जारी
राज्य सरकार ने धान खरीद प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार, धान में नमी की मात्रा 17% से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि किसानों द्वारा बेचे जाने वाले धान की गुणवत्ता उत्कृष्ट हो। इसके साथ ही, सरकार ने किसानों को उनके धान के भुगतान में किसी भी तरह की देरी न करने के स्पष्ट निर्देश अधिकारियों को दिए हैं, ताकि किसानों को आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सहकारिता विभाग के निबंधक (सहयोग समितियां) रजनीश कुमार सिंह ने सोमवार को सभी जिला नोडल पदाधिकारियों के साथ धान खरीद की समीक्षा बैठक की। बैठक में यह पाया गया कि अब तक राज्य में कुल 5408 किसानों से मात्र 38,067 टन धान की खरीद हुई है, जबकि सरकार का लक्ष्य 36.85 लाख टन धान खरीद का है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए, निबंधक ने धान खरीद को शत-प्रतिशत मिशन मोड में सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी कहा कि धान खरीद का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना का लाभ उठा सकें।
नोडल अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि यदि धान खरीद, किसानों के भुगतान या चावल की आपूर्ति को लेकर कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो उसका तत्काल निवारण किया जाए। यह सुनिश्चित करना समितियों की जिम्मेदारी होगी कि धान की खरीद सुचारू रूप से हो और किसानों को समय पर उनका भुगतान मिले।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर धान खरीद एक नवंबर से शुरू हो चुकी है। कोशी, पूर्णिया, तिरहुत, दरभंगा और सारण प्रमंडल के जिलों में यह प्रक्रिया एक नवंबर से जारी है, जबकि राज्य के शेष प्रमंडलों में 15 नवंबर से धान खरीद शुरू हुई है। साधारण धान के लिए 2369 रुपये प्रति क्विंटल और ए-ग्रेड धान के लिए 2389 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की जा रही है। इस प्रक्रिया के लिए राज्य में कुल 5015 पैक्सों का चयन किया गया है।
आंकड़ों के अनुसार, अब तक पूर्णिया जिले में 492 किसानों से 3633 टन, सुपौल में 640 किसानों से 3412 टन, मधेपुरा में 418 किसानों से 3227 टन, पूर्वी चंपारण में 286 किसानों से 2850 टन और सहरसा में 399 किसानों से 2343 टन धान की खरीद की जा चुकी है। सरकार का प्रयास है कि निर्धारित लक्ष्य को समय सीमा के भीतर पूरा किया जा सके और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले।
