Delhi pollution: संसद में बहस नहीं, डॉक्टर ने दिखाए ‘ब्लैक लंग्स’ के सबूत
देश की राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण (Delhi pollution) का संकट लगातार गहरा रहा है, लेकिन संसद के शीतकालीन सत्र में इस गंभीर मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई। इस बीच, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जहरीली हवा के कारण दिल्ली के नागरिकों का स्वास्थ्य गंभीर खतरे में है। मेदांता अस्पताल के डॉ. अरविंद कुमार ने चौंकाने वाले सबूत पेश किए हैं, जिसमें दिखाया गया है कि गैर-धूम्रपान करने वाले किशोरों के फेफड़ों में भी काले धब्बे (ब्लैक डिपॉजिट्स) पाए गए हैं।
डॉ. कुमार ने दिल्ली-एनसीआर के 4,000 बच्चों पर किए गए एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें पाया गया कि 60% बच्चों में श्वसन संबंधी लक्षण थे और एक तिहाई बच्चों को अस्थमा था। उन्होंने चेतावनी दी कि फेफड़ों का कैंसर, जो कभी धूम्रपान करने वालों की बीमारी मानी जाती थी, अब गैर-धूम्रपान करने वाली महिलाओं में भी तेजी से फैल रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस स्थिति को COVID-19 महामारी की तरह ही राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जाए।
एक तरफ जहां स्वास्थ्य विशेषज्ञ तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में कहा कि वायु प्रदूषण और फेफड़ों की बीमारियों के बीच सीधा संबंध अभी तक पूरी तरह से स्थापित नहीं हुआ है। राजनीतिक स्तर पर, भाजपा और आप के बीच दोषारोपण का खेल जारी है, जबकि नागरिक खतरनाक वायु गुणवत्ता को ‘सामान्य’ मानकर जी रहे हैं।
