वर्ष 2025 दिल्ली के उद्योग और व्यापार के लिए मिश्रित अनुभव लेकर आया। सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने व्यापारिक माहौल में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार किया। कई नीतियां व्यापारियों और उद्यमियों के...
वर्ष 2025 दिल्ली के उद्योग और व्यापार के लिए मिश्रित अनुभव लेकर आया। सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने व्यापारिक माहौल में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार किया। कई नीतियां व्यापारियों और उद्यमियों के हित में घोषित की गईं, जिनसे भविष्य में बेहतर कारोबारी माहौल की उम्मीद जगी है। हालांकि, कई महत्वपूर्ण घोषणाएं अभी भी कागजों तक ही सीमित हैं और जमीन पर उतरने का इंतजार कर रही हैं।
इस दौरान, वायु प्रदूषण और लाल किला के पास हुई आतंकी घटना ने दिल्ली के कारोबारी माहौल में चिंता और भय का माहौल पैदा किया। चांदनी चौक में सीलिंग की कार्रवाई ने व्यापारियों के बीच फिर से सीलिंग का डर पैदा कर दिया। इसके अतिरिक्त, रेहड़ी-पटरी वालों के अतिक्रमण, जाम की समस्या और बाजारों व औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं बनी रहीं। सरकार की ओर से औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाओं को बेहतर बनाने और उद्यमियों को संपत्ति का मालिकाना हक देने जैसी घोषणाएं अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं।
नीतिगत सुधारों से मिली राहत
सरकार के स्तर पर कई नीतिगत निर्णय ऐतिहासिक रहे, जिन्होंने समग्र कारोबारी और औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने की क्षमता दिखाई। दिल्ली पुलिस के लाइसेंस और एनओसी की अनिवार्यता से मुक्ति, हेल्थ, ट्रेड और फैक्ट्री लाइसेंस प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाना, तथा इन्हें संपत्ति कर से जोड़ना एक महत्वपूर्ण कदम रहा। यह संभव हुआ क्योंकि केंद्र और दिल्ली में भाजपा की सत्ता के साथ एमसीडी में भी भाजपा के आने से दशकों पुरानी मांगें पूरी हुईं।
नई उद्योग नीति, लॉजिस्टिक्स नीति और आबकारी नीति जैसे सुधारों के साथ सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में आगे बढ़ी है। डीडीए द्वारा वाणिज्यिक केंद्रों का एफएआर (FAR) 250 से बढ़ाकर 300 करने से हजारों व्यापारियों को राहत मिली है।
निवेश आकर्षित करने की पहल
सरकार की मंशा दिल्ली को देश की प्रमुख व्यापारिक राजधानी बनाने की है, जिसके लिए बजट में महत्वाकांक्षी घोषणाएं की गईं। दिल्ली व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन की घोषणा, जो व्यापारियों और सरकार के बीच सेतु का काम करेगा, अभी तक मूर्त रूप नहीं ले पाई है, जिससे व्यापारियों में बेचैनी है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में औद्योगिक नीति 2025-35 के प्रारूप की घोषणा और स्टार्टअप नीति की ओर कदम बढ़ाने से दिल्ली में निवेशकों को आकर्षित करने की उम्मीद जगी है। सरकार जनवरी-फरवरी 2026 में एक वैश्विक निवेशक समिट आयोजित करने की योजना बना रही है, जिसका लक्ष्य दिल्ली को एक प्रमुख निवेश केंद्र बनाना है।
स्टार्टअप और लॉजिस्टिक्स पर जोर
दिल्ली सरकार लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग नीति पर तेजी से काम कर रही है, जिसका उद्देश्य भीड़भाड़ और प्रदूषण को कम करना है। इसमें बाहरी इलाकों में तीन अर्बन कंसालिडेशन सेंटर बनाने और सब्सिडी का प्रस्ताव है, जो व्यापार के क्षेत्र का विस्तार करेगा। स्टार्टअप नीति 2025 के मसौदे के तहत 200 करोड़ रुपये का वेंचर फंड स्थापित कर 2035 तक 5,000 स्टार्टअप खड़े करने और दिल्ली को एक वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
जीएसटी कटौती और आतंकी घटना का प्रभाव
दीपावली से ठीक पहले जीएसटी दरों में भारी कटौती से बाजार और उद्योग को गति मिली, जिससे लोगों की खरीद क्षमता बढ़ी और मांग में 20-30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। हालांकि, लाल किला धमाके ने दिल्ली के प्रमुख कारोबारी ठिकानों पर असर डाला, जिससे कुछ दिनों तक कारोबार में 50 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, खासकर शादी सीजन में परिधानों की बिक्री प्रभावित हुई।
चुनौतियां और भविष्य की उम्मीदें
2025 में नीतिगत सुधारों से दिल्ली व्यापार और उद्योग हब बनने की ओर अग्रसर हुई, लेकिन प्रदूषण और नियामक बाधाओं ने प्रगति को धीमा किया। प्रदूषण के कारण बाजारों का कारोबार प्रभावित हुआ, वहीं डीजल जनरेटर के उपयोग पर रोक और निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध जैसी चुनौतियों ने उद्योग और निर्माण क्षेत्र को प्रभावित किया। बिना पीयूसी (PUC) के ईंधन न मिलने के अभियान से सीमावर्ती क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों की बिक्री में भी गिरावट आई।
पुरानी दिल्ली के थोक बाजारों के पुनर्विकास पर सिर्फ चर्चाएं हुईं, जबकि व्यापारियों ने सरकार को मसौदा भी सौंपा। मुख्यमंत्री ने शाहजहांनाबाद पुनर्विकास निगम (SRDC) के पुनर्गठन की घोषणा की है, जिससे अगले वर्ष में प्रगति की उम्मीद है। हालांकि, चांदनी चौक और सदर बाजार में रेहड़ी-पटरी वालों का अतिक्रमण और बाजारों में मूलभूत सुविधाओं की कमी निराशाजनक बनी रही।