कर्ज का बोझ और मौत का फंदा: मुजफ्फरपुर में कई परिवारों की जिंदगी खत्म, पुलिस-प्रशासन बेखबर
मुजफ्फरपुर जिले में कर्ज और लोन के बोझ तले दबकर कई परिवारों की जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं। अत्यधिक कर्ज के कारण लोगों को आत्महत्या जैसे कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अधिकतर मामलों में नन बैंकिंग कंपनियों के कर्मियों द्वारा पीड़ित परिवार को दबाव देने की बात सामने आई है।
सकरा में घटी हालिया घटना ने पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर कैसे खुलेआम ये समूह बनाकर लोन बांट रहे हैं और 25-30 प्रतिशत ब्याज वसूल रहे हैं। इसका लेखाजोखा न पुलिस और न प्रशासन के पास है। सकरा प्रखंड में कर्ज के बोझ और फाइनेंस कंपनियों के दबाव में कई परिवार उजड़ चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
मार्च 2023 में सकरा के वाजिद पंचायत, वार्ड संख्या 10 में कर्ज में डूबे मजदूर दंपती शिवनाथ दास (60) और उनकी पत्नी भुखली देवी (55) ने भी आत्महत्या कर ली थी। दोनों ने घर से करीब आधा किलोमीटर दूर एक पीपल के पेड़ में फंदा लगाकर जान दे दी थी। दंपती ने भी नन बैंकिंग कंपनी से करीब सात लाख रुपये का कर्ज लिया था। किस्त चुकाने के लिए कर्मी लगातार घर पहुंचकर दबाव बनाते और प्रताड़ित करते थे। घर में ताला जड़ देने की धमकी दी गई थी। इसी से आहत होकर दंपति ने आत्महत्या कर ली।
जून 2023 में सिराजाबाद पंचायत में बर्फ का काम करने वाले एक व्यक्ति ने चार लाख रुपये का लोन लिया था। समय पर किस्त जमा नहीं होने पर उसे लगातार प्रताड़ित किया गया, जिससे तंग आकर उसने भी आत्महत्या कर ली थी। वर्ष 2024 में पियर थाना क्षेत्र अंतर्गत भी एक महिला जब लोन नहीं चुकता कर पाई और उसे धमकी दिया जाने लगा तो उसने भी अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली थी।
वर्ष 2021 में मिठनपुरा में कर्ज में डूबे एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी, क्योंकि सूदखोर उसपर दबाव बना रहे थे और धमकी दे रहे थे। पिछले वर्ष मुशहरी में भी एक दंपती ने कर्ज नहीं चुकता करने पर आत्महत्या कर ली थी। पांच-छह गुंडे उनके घर पर आकर धमकी देकर गए थे। बदनामी के डर से उन्होंने मौत को गले लगाया।
