इंदौर में दूषित पानी से मौतें: मिनरल वाटर की मांग 5 गुना बढ़ी, लोगों में डर
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हाल ही में हुई 20 मौतों ने स्थानीय निवासियों के बीच पीने के पानी को लेकर गहरा डर पैदा कर दिया है। धर्मेंद्र जैसे कई निवासी अब टैंकर या बोरिंग के पानी पर भरोसा नहीं कर रहे हैं और रोजाना मिनरल वाटर की बोतलें मंगवाने को मजबूर हैं। इस वजह से पिछले दस दिनों में मिनरल वाटर की खपत में पांच गुना वृद्धि देखी गई है।
भागीरथपुरा की इस घटना ने पूरे शहर को पीने के पानी की गुणवत्ता पर दोबारा सोचने पर विवश कर दिया है। शहर भर में बिसलेरी, किनले जैसे ब्रांडेड और लोकल ब्रांड के मिनरल वाटर की बिक्री में लगभग 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि नए ग्राहक बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं, यहां तक कि उन इलाकों से भी मांग आ रही है जहां पानी की आपूर्ति सामान्य है, लेकिन लोग अब कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। छात्र और उनके परिजन विशेष रूप से चिंतित हैं, जो गूगल पर संपर्क ढूंढकर अपने बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।
इस त्रासदी का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। मिनरल वाटर के कारोबार में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। आरओ प्लांट संचालकों के अनुसार, पहले जहां वे दिनभर में 20-25 कैंपर सप्लाई करते थे, वहीं अब यह संख्या 100-125 तक पहुंच गई है। मांग इतनी बढ़ गई है कि सप्लाई के लिए सुबह और शाम दोनों समय गाड़ियां भेजनी पड़ रही हैं। यह डर घरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि चाय की दुकानों और भोजनालयों जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भी इसका असर दिख रहा है, जहां अब खाना बनाने के लिए भी मिनरल वाटर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
