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इंदौर में दूषित पानी का कहर: भागीरथपुरा में 20 मौतों के बाद बढ़ी मिनरल वाटर की मांग, लोगों में डर

By Jan 8, 2026

इंदौर के भागीरथपुरा में 20 लोगों की मौत के बाद स्थानीय निवासियों में पीने के पानी को लेकर गहरा खौफ है। धर्मेंद्र जैसे कई लोग अब टैंकर और बोरिंग के पानी पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। वे रोजाना मिनरल वाटर की बोतलें मंगा रहे हैं, जिससे पिछले दस दिनों में इसकी खपत में पांच गुना बढ़ोतरी हुई है। इस त्रासदी ने शहरवासियों को पीने के पानी की गुणवत्ता पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है।

भागीरथपुरा कांड का असर

इस घटना के बाद से शहरभर में बिसलेरी, किनले और अन्य लोकल ब्रांड के मिनरल वाटर की खपत में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है। डिस्ट्रीब्यूटर्स के अनुसार, नए ग्राहक जुड़े हैं और उन इलाकों से भी डिमांड आ रही है जहाँ साफ पानी आ रहा है, लेकिन लोग अब कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। खासकर बाहर पढ़ने वाले बच्चे और उनके परिजन ज्यादा चिंतित हैं, जो गूगल पर संपर्क ढूंढकर पानी की सप्लाई सुनिश्चित कर रहे हैं। ठंड और बारिश के दिनों में जहां पानी की बिक्री घट जाती है, वहीं इस बार मांग बढ़ी है। शहर के 200 से ज्यादा आरओ प्लांट की खपत में भी 25 से 30 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

आर्थिक बोझ और डर

भागीरथपुरा की तंग गलियों में घूमते हुए हर चेहरे पर डर दिखाई देता है। धर्मेंद्र सिंह जैसे लोग, जो जनरल स्टोर चलाकर परिवार का पेट पालते हैं, अब रोज 40 रुपए का एक कैंपर खरीदकर ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि नल से पानी नहीं आ रहा और बोरिंग के पानी का उपयोग केवल नहाने व कपड़े धोने जैसे कामों में कर रहे हैं। कई परिवारों के लिए रोज 40-50 रुपए पानी पर खर्च करना संभव नहीं है, वे डर के साए में जी रहे हैं और पानी उबालकर पीने को मजबूर हैं।

बाजार का बदला गणित

इस त्रासदी ने क्षेत्र के अर्थशास्त्र को भी पूरी तरह बदल दिया है। मिनरल वाटर के कारोबार में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हुई है। आरओ प्लांट चलाने वाले कमल परमार बताते हैं कि पहले जहाँ दिनभर में 20-25 कैंपर सप्लाई होते थे, वहीं अब यह संख्या 100-125 तक पहुँच गई है। इस क्षेत्र में कुल चार आरओ प्लांट हैं और सभी जगह मांग लगभग पांच गुना बढ़ गई है। फोन लगातार बजते रहते हैं, जो इस बढ़ी हुई मांग को दर्शाता है।

व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर असर

यह डर सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर भी इसका गहरा असर दिख रहा है। भागीरथपुरा चौराहे पर भोजनालय चलाने वाली लक्ष्मी पटेल ने खाना बनाने के लिए बोरिंग के पानी का उपयोग पूरी तरह बंद कर दिया है। उन्होंने बताया कि पहले बोरिंग का पानी इस्तेमाल करते थे, लेकिन मौतों का सिलसिला शुरू होने के बाद मिनरल वाटर से खाना बनाना शुरू कर दिया है, जिसमें रोज दो कैंपर लग जाते हैं।

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