ड्यूटी से गायब 7 डॉक्टर बर्खास्त, वेतन वृद्धि रोकी गई
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग में अनुशासनहीनता और लापरवाही के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने लंबे समय से तैनाती स्थल से अनुपस्थित चल रहे सात चिकित्साधिकारियों को तत्काल सेवा से बर्खास्त करने के निर्देश जारी किए हैं। इन चिकित्साधिकारियों की अनुपस्थिति ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) के कामकाज पर गंभीर असर डाला था।
जिन अधिकारियों को बर्खास्त किया गया है, उनमें पीएचसी लेखराजपुर मैनपुरी, सुलतानपुर सांडा, सढ़ौली कदीम सहारनपुर, सीएचसी भोगांव मैनपुरी, हाटा कुशीनगर और सीएमओ बाराबंकी के अधीन एक चिकित्साधिकारी शामिल हैं। इन सभी की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए उप मुख्यमंत्री ने यह कठोर निर्णय लिया है।
इसके साथ ही, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) फर्रुखाबाद को मैनपुरी में शासकीय आवास खाली करने में देरी के कारण परिनिंदा दंड के निर्देश दिए गए हैं। यह कार्रवाई सरकारी आवासों के उचित आवंटन और उपयोग को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
बरेली के 300 बेड अस्पताल के अधीक्षक से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है। उन पर ओपीडी में मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं न देने, अधीनस्थ चिकित्सकों व कर्मचारियों पर नियंत्रण न रखने और अस्पताल परिसर में साफ-सफाई का ध्यान न रखने जैसे गंभीर आरोप हैं।
जिला चिकित्सालय गौतमबुद्धनगर में अल्ट्रासाउंड की गलत रिपोर्ट बनाने के मामले में वरिष्ठ परामर्शदाता रेडियोलाजिस्ट को दो वेतनवृद्धियों को रोकने और परिनिंदा का दंड देने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई चिकित्सा जांचों की सटीकता और गुणवत्ता बनाए रखने के महत्व को दर्शाती है।
सीएमओ बुलंदशहर के अधीन एक चिकित्सक को गौतमबुद्ध नगर में तैनाती के दौरान निजी चिकित्सालयों में प्रैक्टिस करने के आरोप में गोंडा में तैनात चिकित्साधिकारी को तीन-तीन वेतनवृद्धियां रोकने और परिनिंदा का दंड दिए जाने के निर्देश मिले हैं। वहीं, प्रभारी चिकित्साधिकारी पीएचसी मुडिया नबीबक्श बरेली में रहते हुए उच्चाधिकारियों से अभद्र व्यवहार करने पर भी कार्रवाई की गई है।
उपमुख्यमंत्री के इन सख्त निर्देशों से स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। यह कार्रवाई सरकारी महकमे में जवाबदेही और कार्यकुशलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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