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दरभंगा में धान खरीद का लक्ष्य चार साल से अधूरा, किसान परेशान

By Dec 1, 2025

दरभंगा जिले में धान खरीद का सरकारी लक्ष्य पिछले चार वर्षों से लगातार अधूरा साबित हो रहा है। सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों की उदासीनता का मुख्य कारण भुगतान प्रक्रिया का जटिल होना और पैक्सों द्वारा नमी के नाम पर की जाने वाली कटौती है। इस कारण किसान अपनी उपज का सही मूल्य पाने के बजाय स्थानीय व्यापारियों को कम दाम पर बेचने को विवश हैं।nnकिसानों का कहना है कि धान की कटाई के तुरंत बाद रबी फसल की बुआई का समय आ जाता है। इस दौरान खाद, बीज और जुताई के लिए तत्काल पैसों की आवश्यकता होती है। सरकारी खरीद में भुगतान में एक महीने तक का समय लग जाता है, जो किसानों की तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने में नाकाम रहता है। इसलिए, वे मजबूरी में व्यापारियों के हाथों औने-पौने दाम पर धान बेच देते हैं। सरकार द्वारा धान में नमी के नाम पर प्रति क्विंटल पांच से दस किलो की कटौती भी किसानों को परेशान करती है।nnसरकारी खरीद के लिए इस वर्ष 96 समितियों का चयन किया गया है, जिनमें 84 पैक्सों के माध्यम से अब तक 161 किसानों से 10266.4 क्विंटल धान की खरीद हुई है, जिसमें से 105 किसानों का भुगतान किया जा चुका है। धान का समर्थन मूल्य सामान्य धान के लिए 2369 रुपये और ए-ग्रेड धान के लिए 2389 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। सहकारिता विभाग के नियमानुसार, रैयत किसान से अधिकतम 250 क्विंटल और गैर-रैयत किसान से अधिकतम 100 क्विंटल धान की खरीद की जानी है।nnपिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है। वर्ष 2021-22 में 35000 मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध 34956 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी। वर्ष 2022-23 में 76375 मीट्रिक टन लक्ष्य के मुकाबले 48553 मीट्रिक टन धान खरीदा गया। वर्ष 2023-24 में 80212 मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 28563 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई। चालू वर्ष 2024-25 में 73757 मीट्रिक टन लक्ष्य के विरुद्ध 41366 मीट्रिक टन धान की खरीद की गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि सरकारी खरीद प्रक्रिया किसानों के लिए सुविधाजनक नहीं है, जिससे उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है और वे सरकारी योजनाओं से वंचित रहित हो रहे हैं।”

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