जबलपुर में ‘इंदौर’ जैसी जल त्रासदी का खतरा, 50 साल पुराना खुला टैंक बना बीमारियों का घर: Jabalpur News
मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में एक बड़ी स्वास्थ्य आपदा का खतरा मंडरा रहा है। कांचघर स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में लगभग 50 साल पुराना एक खुला भूमिगत पेयजल टैंक हजारों निवासियों के लिए गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इंदौर में हुई जल त्रासदी की घटना के बाद, इस खुले टैंक से दूषित पेयजल आपूर्ति की आशंका ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लगभग 5 हजार लोग इसी असुरक्षित पानी पर निर्भर हैं, जिससे संक्रमण और महामारी फैलने का जोखिम बना हुआ है। यह स्थिति शहर के लिए एक गंभीर चुनौती है और इस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है, जैसा कि विभिन्न jabalpur news रिपोर्टों में सामने आया है।
कॉलोनी में पेयजल आपूर्ति का यह मुख्य स्रोत 24 घंटे खुला रहता है। इसके आसपास गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा हुआ है, जिससे कीड़े-मकोड़े और अन्य जीव-जंतुओं के टैंक में गिरने की आशंका बनी रहती है। निवासियों का कहना है कि नियमित सफाई न होने के कारण पानी में गंदगी घुल जाती है। चार साल पहले इसी टैंक में एक बिल्ली गिर गई थी, जिससे पूरे क्षेत्र में पानी दूषित हो गया था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इससे कोई सबक नहीं लिया। वर्तमान में भी कई घरों में गंदा पानी पहुंच रहा है, जिसे बिना छाने या उबाले पीना स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, कॉलोनी की मुख्य जल टंकी भी लगभग 40 साल पुरानी है और 1997 के भूकंप के बाद से जर्जर हालत में है। सुरक्षा कारणों से अब इसमें पानी नहीं भरा जाता, लेकिन इसके नीचे बने पंप हाउस से ही भूमिगत टैंक में पानी भरकर आपूर्ति की जाती है। जर्जर टंकी को गिराने का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद नगर निगम की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा, शहर में लगभग 50 प्रतिशत पानी दूषित होने का एक बड़ा कारण पिछले 20 वर्षों से नालियों के भीतर से गुजर रही जल वितरण पाइपलाइनें हैं, जिनमें लीकेज से पेयजल प्रदूषित हो रहा है।
नगर निगम के कार्यपालन यंत्री (जल) ने दावा किया है कि टैंक की सफाई समय-समय पर कराई जाती है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘अमृत योजना 2.0’ के तहत क्षेत्र में नई टंकी स्वीकृत हो चुकी है और उसका निर्माण कार्य शुरू हो गया है। नई टंकी के तैयार होने के बाद ही जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार संभव होगा। हालांकि, नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शन मंच ने महापौर और निगमायुक्त को पत्र लिखकर नालियों के भीतर से गुजर रही पुरानी पाइपलाइनों को तत्काल हटाने की मांग की है, ताकि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
