दिव्यांग बच्चों का कल्याण समाज की सामूहिक जिम्मेदारी: राज्यपाल थावरचंद गहलोत
लखनऊ: कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा है कि बौद्धिक दिव्यांग बच्चों का समग्र कल्याण समाज की एक सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अभिभावकों को उनकी प्रक्रियाओं में सहयोग मिलना अत्यंत आवश्यक है, ताकि इन बच्चों का भविष्य सुरक्षित और उज्ज्वल बन सके।
राज्यपाल गहलोत राष्ट्रीय संस्थान बौद्धिक दिव्यांगजन सशक्तिकरण द्वारा डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में आयोजित 31वें राष्ट्रीय अभिभावक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार बौद्धिक दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास के लिए हर संभव कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी ने भी बौद्धिक दिव्यांगजनों को समाज में समान अवसर प्रदान करने का आह्वान किया।
सम्मेलन के दौरान, पैरिवार-नेशनल कंफेडरेशन ऑफ पेरेंट्स ऑर्गेनाइजेशंस की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 और सौम्या उपाध्याय ‘तताई’ द्वारा लिखित पुस्तक का विमोचन किया गया। इसके साथ ही, रोशनी सोसायटी हल्द्वानी, परिवार पलक्कड़ और मेसेनी पोंग पोंगें को प्रतिष्ठित पैरिवार राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। स्पेशल ओलंपिक्स वर्ल्ड गेम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आठ बौद्धिक दिव्यांग खिलाड़ियों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया, जो उनकी प्रतिभा और कड़ी मेहनत का प्रमाण है।
इस महत्वपूर्ण आयोजन में यूपी पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. सुबोध शंकर, राज्य दिव्यांगजन आयुक्त प्रो. हिमांशु शेखर झा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने दिव्यांगजनों के कल्याण और सशक्तिकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। यह सम्मेलन दिव्यांगजनों के प्रति समाज की सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है और उनके बेहतर भविष्य के लिए एक सकारात्मक दिशा प्रदान करता है।
