दिवंगत IPS पूरन कुमार के गनमैन को मिली जमानत, पुलिस चालान पेश करने में विफल
रोहतक की एक अदालत ने दिवंगत IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार के गनमैन सुशील कुमार को शनिवार को डिफ़ॉल्ट बेल (वैधानिक जमानत) प्रदान कर दी है। यह निर्णय पुलिस द्वारा मामले में 60 दिनों के भीतर चार्जशीट (चालान) दाखिल करने में विफलता के बाद आया।
सुशील कुमार के अधिवक्ता जोगेंद्र चंदेला ने बताया कि निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद पुलिस द्वारा अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। इस कानूनी आधार पर, गनमैन की ओर से जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया है।
यह मामला तब और चर्चा में आया जब सुशील कुमार की पत्नी सोनी देवी ने जेल प्रशासन और सरकार के अधिकारियों को पत्र लिखकर अपने पति की जान को खतरा बताया था। उन्होंने सुशील कुमार को रोहतक की सुनारियां जेल से किसी अन्य जेल में स्थानांतरित करने की मांग की थी। पत्नी द्वारा भेजे गए पत्र में दो कैदियों द्वारा सुशील कुमार को जान से मारने की धमकी देने का उल्लेख किया गया था। इस चिंता के बाद, सुशील कुमार को रोहतक जेल से अंबाला जेल स्थानांतरित कर दिया गया था।
हालांकि, पुलिस का दावा है कि मामले में चालान तैयार किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, चालान को अदालत में पेश करने के लिए ले जाया गया था, लेकिन उसमें कुछ आपत्तियां पाई गईं, जिन्हें ठीक किया जा रहा है। पुलिस का कहना है कि आपत्तियों को दूर करने के बाद जल्द ही संशोधित चालान अदालत में पेश किया जाएगा।
वैधानिक जमानत, जिसे डिफ़ॉल्ट बेल भी कहा जाता है, आरोपी का एक कानूनी अधिकार है। यह तब लागू होता है जब जांच एजेंसी किसी मामले में निर्धारित समय सीमा (आमतौर पर 60 या 90 दिन) के भीतर जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल करने में विफल रहती है। यह आरोपी के मौलिक अधिकारों में से एक है और जांच में अत्यधिक देरी होने पर, गंभीर अपराधों में भी आरोपी को इस आधार पर रिहाई मिल सकती है।
