दिसंबर में आरबीआई रेपो रेट पर बड़ा फैसला, क्या कम होगा आपके होम लोन का बोझ?
दिसंबर 2025 में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की आगामी बैठक पर देश भर के करोड़ों कर्जदारों की निगाहें टिकी हुई हैं। इस द्वैमासिक बैठक में आरबीआई रेपो रेट की समीक्षा करेगा, जिसके परिणामस्वरूप आपके होम लोन और अन्य कर्जों की मासिक किस्त (EMI) पर सीधा असर पड़ सकता है। क्या आरबीआई इस बार ब्याज दरों में कटौती कर लाखों लोगों को राहत देगा? यह सवाल इस वक्त सबसे अहम है।
आरबीआई हर दो महीने में रेपो रेट की समीक्षा करता है। यह वह दर है जिस पर वाणिज्यिक बैंक अपनी अल्पकालिक जरूरतों के लिए केंद्रीय बैंक से उधार लेते हैं। रेपो रेट में होने वाले बदलाव सीधे तौर पर बैंकों द्वारा दिए जाने वाले कर्जों की ब्याज दरों को प्रभावित करते हैं। इससे पहले, अक्टूबर 2025 में हुई बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट को 5.5 फीसदी पर बरकरार रखने का फैसला किया था और जून से अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स और वित्तीय विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार, आगामी दिसंबर बैठक में आरबीआई रेपो रेट में कटौती कर सकता है। हालांकि, कटौती की संभावित सीमा को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह अर्थव्यवस्था में तरलता बढ़ाने और उपभोक्ता खर्च को प्रोत्साहित करने में मदद करेगा।
रेपो रेट में कटौती का सीधा फायदा आम आदमी को मिलेगा। जब आरबीआई रेपो रेट कम करता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है। इस लागत में कमी का लाभ बैंक ग्राहकों को देते हैं, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन जैसे विभिन्न कर्जों की ब्याज दरें घट जाती हैं। नतीजतन, आपकी मासिक किस्त (EMI) कम हो जाएगी, जिससे वित्तीय बोझ हल्का होगा।
इसके विपरीत, रेपो रेट में वृद्धि से बैंकों के लिए धन महंगा हो जाता है, जिसका बोझ वे ग्राहकों पर डालते हैं, जिससे लोन की ब्याज दरें और EMI बढ़ जाती हैं। आरबीआई अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए रेपो रेट को एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उपयोग करता है। दिसंबर में होने वाला फैसला यह निर्धारित करेगा कि आने वाले महीनों में आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा और क्या नए साल से पहले आपको कोई बड़ी वित्तीय राहत मिल पाएगी।
