दिसंबर का पहला प्रदोष व्रत: 2 को मनाई जाएगी शिव-पार्वती की पूजा
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है, जिनकी पूजा-अर्चना से साधकों को सुख-समृद्धि और मंगल की प्राप्ति होती है। प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत मनाया जाता है।
इस वर्ष दिसंबर माह का पहला प्रदोष व्रत 2 दिसंबर को रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार, त्रयोदशी तिथि का आरंभ 2 दिसंबर को दोपहर 03 बजकर 57 मिनट पर होगा और इसका समापन 3 दिसंबर को दोपहर 12 बजकर 25 मिनट पर होगा। प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विधान है, इसलिए 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। 2 दिसंबर को प्रदोष काल शाम 05 बजकर 33 मिनट से रात्रि 08 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में भक्त भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।
ज्योतिषियों के अनुसार, इस वर्ष 2 दिसंबर को पड़ने वाले प्रदोष व्रत पर कई शुभ योगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही अश्विनी नक्षत्र का भी प्रभाव रहेगा। इन दुर्लभ योगों में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से साधकों को विशेष कृपा प्राप्त होगी। ऐसी मान्यता है कि इन शुभ संयोगों में की गई पूजा से जीवन के सभी कष्टों का निवारण होता है और साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत के दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। इसके बाद व्रत का संकल्प लिया जाता है। दिन भर व्रत रखने के बाद शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। पूजा के दौरान शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और चीनी आदि से अभिषेक किया जाता है। बेलपत्र, धतूरा, फूल आदि अर्पित किए जाते हैं। भगवान शिव के मंत्रों का जाप किया जाता है। अंत में आरती की जाती है। मान्यता है कि इस प्रकार श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
