दहशत का पर्याय वीरझन यादव गिरफ्तार, दशकों पुराना हत्या का केस आया सामने
पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी थाना क्षेत्र में पुलिस ने उस समय बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया जब एक कुख्यात दस्यु सरगना को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार दस्यु सरगना की पहचान वीरझन यादव के रूप में हुई है, जिसके नाम से कभी इलाके में खौफ का माहौल रहता था। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि वीरझन यादव अपने गांव चौमुखा में छिपा हुआ है।
सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में एक विशेष टीम का गठन कर दबिश दी गई। पुलिस की घेराबंदी और तेजी से हुई कार्रवाई के बाद वीरझन यादव को उसके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया गया। सूत्रों के अनुसार, वीरझन यादव पर दशकों पहले हत्या का आरोप है और वह लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर था।
जानकारी के मुताबिक, वीरझन यादव अपने बड़े भाई दस्यु बंशी यादव के साथ मिलकर वर्ष 1990 से 2005 तक योगापट्टी, बथुवडिया, चौतरवा, बगहा और बैरिया जैसे थाना क्षेत्रों में कई जघन्य अपराधों को अंजाम दे चुका था। इन वारदातों ने पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर दी थी। हालांकि, बाद में गैंगवार में उसके भाई बंशी यादव की मौत हो गई, जिसके बाद वीरझन यादव ने अपराध की दुनिया से दूरी बना ली और अपने गांव चौमुखा में रहकर शांतिपूर्ण जीवन जीने लगा।
कुछ समय पहले तक पुलिस की लगातार कार्रवाई और अन्य दस्यु गिरोहों की दस्तक के चलते वीरझन यादव ने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद वह करीब एक दशक तक जेल में रहा। जेल से बाहर आने के बाद भी, पुराने आपराधिक मामलों में जब भी सुनवाई होती थी, वह अदालत में अपनी हाजिरी दर्ज कराता था।
थानाध्यक्ष अभिराम सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी वीरझन यादव के खिलाफ बगहा पुलिस जिला के चौतरवा थाना में वर्ष 2004 में कांड संख्या 57/2004 के तहत मामला दर्ज है। वह इस मामले में लंबे समय से एक वांछित वारंटी के रूप में फरार चल रहा था। पुलिस को उसकी गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली, जिसके आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, वीरझन यादव की भूमिका कई पुराने आपराधिक मामलों में संदिग्ध रही है। थानाध्यक्ष ने यह भी बताया कि फरार चल रहे अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए अभियान तेज कर दिया गया है और ऐसे सभी अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि क्षेत्र में कानून व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।
