डायरिया से जंग: दवा विक्रेताओं से मांगी गई मदद, घर-घर होगी जागरूकता
शहर में डायरिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए, ‘डायरिया से डर नहीं’ नामक जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए जनपद के दवा विक्रेता एवं केमिस्ट एसोसिएशन से सहयोग की अपील की गई है। सोमवार को आयोजित एक विशेष कार्यशाला में, कार्यक्रम की महत्ता और इसे सफल बनाने में दवा विक्रेताओं के योगदान पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मेडिकल स्टोर पर आने वाले लोगों को डायरिया के लक्षणों, कारणों और बचाव के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दवा विक्रेता न केवल दवाएं बेचते हैं, बल्कि वे समुदाय के लिए स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का एक महत्वपूर्ण स्रोत भी हैं। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति डायरिया के लक्षणों से पीड़ित दिखाई देता है, तो उसे तत्काल चिकित्सक के पास भेजने में दवा विक्रेताओं की भूमिका अत्यंत अहम होगी। यह शुरुआती पहचान और उपचार डायरिया को गंभीर होने से रोक सकता है।
पापुलेशन सर्विसेज इंटरनेशनल के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर अनिल द्विवेदी ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि डायरिया को लेकर समाज में कई तरह की भ्रांतियां फैली हुई हैं, जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। उन्होंने विश्वास जताया कि दवा विक्रेता, जो सीधे आम लोगों के संपर्क में रहते हैं, इन भ्रांतियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे लोगों को सही जानकारी देकर और अंधविश्वासों से बचाकर डायरिया की रोकथाम में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
यह ‘डायरिया से डर नहीं’ कार्यक्रम वर्तमान में उत्तर प्रदेश के 13 जिलों और बिहार के तीन जिलों में चलाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य डायरिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना और इसके प्रसार को रोकना है। इस कार्यक्रम के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग और सहयोगी संस्थाएं मिलकर समुदायों को डायरिया से बचाव के लिए आवश्यक जानकारी और साधन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही हैं।
