लखनऊ के चारबाग और आलमबाग इलाकों में गुरुवार को यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आई। चारबाग बस अड्डे को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाना है, जिसके लिए बसों को आलमबाग शिफ्ट करने...
लखनऊ के चारबाग और आलमबाग इलाकों में गुरुवार को यातायात व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आई। चारबाग बस अड्डे को पीपीपी मॉडल के तहत विकसित किया जाना है, जिसके लिए बसों को आलमबाग शिफ्ट करने का आदेश था। हालांकि, परिवहन निगम के अधिकारियों के दावों के बावजूद बसों की सुचारु शिफ्टिंग नहीं हो पाई। आलम यह था कि चारबाग और आलमबाग बस अड्डों के बाहर बसों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम जनता का निकलना मुश्किल हो गया।
अधिकारियों की लापरवाही से बिगड़े हालात
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक आरके त्रिपाठी ने बसों को 15 जनवरी तक पूर्णतः आलमबाग शिफ्ट करने का दावा किया था और प्रवर्तन टीमों को दिशा-निर्देश भी जारी किए थे। इसके बावजूद, गुरुवार को हालात बदतर रहे। चारबाग बस स्टेशन के बाहर बसों की लंबी कतारें लगी रहीं, वहीं आलमबाग बस स्टेशन के बाहर भी बस कंडक्टर सवारियां ढोते नजर आए। इससे दोनों ही क्षेत्रों में भीषण जाम की स्थिति बनी रही। चारबाग से प्रतिदिन करीब 350 बसें विभिन्न प्रमुख शहरों के लिए आवागमन करती हैं, जिससे हर दिन 22 से 25 हजार लोग यात्रा करते हैं।
सुरक्षाकर्मियों और राहगीरों के बीच विवाद
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने टेढ़ी पुलिया, आलमबाग थाना और चारबाग बस स्टेशन के सामने सुरक्षा गार्डों की तैनाती की थी। इन गार्डों का काम नियम तोड़ने वाली बसों पर जुर्माना लगाना और उन्हें रोकना था। लेकिन, इसके बावजूद रोडवेज बसें मुख्य सड़कों पर खड़ी रहीं, जिससे जाम की समस्या और बढ़ गई। इस दौरान कार्यदायी संस्था के गार्डों और आम राहगीरों के बीच कई बार विवाद भी हुए, जब गार्डों ने लोगों को बस अड्डे के आसपास पहुंचने से रोका।
यात्रियों को हुई भारी परेशानी
चारबाग में रेलवे स्टेशन, कॉलेज और सरकारी कार्यालय होने के कारण सुबह से लगे भीषण जाम ने लोगों को कार्यालय पहुंचने में भारी परेशानी पैदा की। वहीं, रेलवे स्टेशन आने-जाने वाले यात्रियों की ट्रेनें भी जाम के कारण छूटते-छूटते बचीं। परिवहन निगम के अधिकारियों का कहना है कि दो-तीन दिनों में बसों का संचालन सामान्य हो जाएगा।