तस्करों और घुसपैठियों पर नकेल: HAL बनाएगा 8 नए डोर्नियर विमान, समुद्री सुरक्षा होगी हाईटेक
रक्षा मंत्रालय ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की कानपुर स्थित टीएडी डिवीजन के साथ आठ नए डोर्नियर विमान बनाने का एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह कदम देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन विमानों को विशेष रूप से घुसपैठियों, तस्करों और अवैध समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
HAL की कानपुर इकाई ने पहले भी गुयाना को दो विमान निर्यात किए हैं और भारतीय तटरक्षक बल को 19 विमानों की आपूर्ति की है। नए करार के तहत बनने वाले ये आठ डोर्नियर विमान 75% स्वदेशी सामग्री से निर्मित होंगे और इनमें आधुनिक सेंसर, ग्लाल कॉकपिट और डबल टर्बो इंजन जैसी हाईटेक सुविधाएं होंगी। कई देशों ने भी इन उन्नत विमानों को खरीदने में रुचि दिखाई है।
समुद्री निगरानी में बढ़ी क्षमता
मिड लाइन एडवांस डोर्नियर विमानों की क्षमता को HAL ने और भी बढ़ाया है। अब ये विमान अवैध मछली पकड़ने, तस्करी, समुद्री डकैती और संभावित घुसपैठ को नाकाम करने में अधिक सक्षम होंगे। इनके गश्ती रडार और इन्फ्रारेड सेंसर विशाल समुद्री क्षेत्रों की निगरानी में मदद करेंगे। ये विमान खराब मौसम में भी लंबी दूरी तक उड़ान भरने और संदिग्ध जहाजों की पहचान कर त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम हैं। सैटेलाइट कम्युनिकेशन की मदद से खराब मौसम में भी संचार बनाए रखा जा सकेगा।
इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस और हथियार प्रणाली
ये डोर्नियर विमान इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम से भी लैस होंगे, जो पायलट को किसी भी खतरे को भांपने और मिसाइल को ट्रैक करने में मदद करेंगे। पल्स, पल्स डॉपलर और रडारों के संकेत से दुश्मन की गतिविधियों का पता चलेगा। सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) तकनीक से विमान को विस्तृत और स्पष्ट तस्वीरें मिलेंगी। HAL के सूत्रों के अनुसार, इन विमानों को दुश्मनों और समुद्री घुसपैठियों पर गोलियां बरसाने में भी सक्षम बनाया जा रहा है। इसके लिए 12.7 एमएम क्षमता का गन सिस्टम लगाने हेतु एचएएल का डीपीएसयू कंपनी एडब्ल्यूईआईएल और डीआरडीओ के साथ एमओयू हुआ है।
डोर्नियर-228 की मुख्य विशेषताएं:
54.4 फीट लंबे इस विमान को दो पायलट उड़ाते हैं।
यह 19 लोगों को बैठाकर लगातार 10 घंटे उड़ान भर सकता है।
इसकी अधिकतम रफ्तार 413 किमी प्रति घंटे है।
यह 792 मीटर रनवे से उड़ान भर सकता है और 451 मीटर रनवे पर उतर सकता है।
उन्नत कॉकपिट और संचार प्रणाली:
अत्याधुनिक ग्लास कॉकपिट में मल्टी-फंक्शन डिस्प्ले, डिजिटल ऑटो पायलट और उन्नत नेविगेशन सिस्टम पायलटों का वर्क लोड कम करते हैं। इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इन्फ्रारेड सेंसर से लैस रडार और स्वचालित पहचान प्रणाली (एआईएस) सटीकता से पहचान करने में सहायक हैं। उपग्रह संचार (सैटकॉम) और सुरक्षित डेटा लिंक के माध्यम से नौसेना के जहाजों, तटीय स्टेशनों और एजेंसियों के साथ निर्बाध समन्वय संभव है, यहां तक कि खराब मौसम में भी।
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