सोनीपत, कोयंबटूर के बाद देश का दूसरा सर्वाधिक प्रदूषित शहर बन गया है। रविवार को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 329 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। वहीं आइक्यू एयर पर...
सोनीपत, कोयंबटूर के बाद देश का दूसरा सर्वाधिक प्रदूषित शहर बन गया है। रविवार को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 329 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। वहीं आइक्यू एयर पर जिले का AQI 182 दर्ज किया गया। नवंबर के 20 दिन AQI 300 के पार रहा, जिससे शहर की हवा गंभीर स्तर पर प्रदूषित बनी हुई है। इससे पहले दीवाली के बाद भी सोनीपत की हवा देश में सबसे अधिक प्रदूषित हो गई थी, हालांकि यह स्थिति एक ही दिन बनी थी।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लगातार कोशिशें नाकाम हो रही हैं। ग्रैप-3 में निर्माण कार्यों से पाबंदी हटने, साइटों व रास्तों पर धूल उड़ने, पानी का पर्याप्त छिड़काव न होने, शहर में लगातार कचरा जलाए जाने, वाहनों और फैक्ट्रियों के धुएं से जिले में लगातार प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है।
जिले में 10 नवंबर को AQI 300 के पार चला गया था, जो अगले दिन बढ़कर 381 तक पहुंच गया था, लगातार 15 दिन तक AQI 300 से अधिक बना रहा। 25 नवंबर को यह 300 से नीचे आया था। दो दिन हवा की स्थिति में सुधार को देखते हुए जिला प्रशासन ने 27 नवंबर को जिले में ग्रैप-3 की पाबंदियां हटा दी थी, जिसके बाद निजी निर्माण कार्यों पर लगी रोक को हटा दिया गया था। परिणाम यह रहा कि हवा की स्थिति फिर खराब हो गई और AQI फिर 300 के पार पहुंच गया, जो अब तक बरकरार है।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में धूलकणों का बढ़ता जमाव, औद्योगिक गतिविधियां, ठंड के कारण हवा का नीचे दबाव और अनियंत्रित वाहन उत्सर्जन इस प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। चिकित्सक ऐसे मौसम में लोगों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने, मास्क पहनने और सुबह-शाम के समय सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।
औद्योगिक उत्सर्जन: सोनीपत और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और रसायन वायु गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर रहे हैं। कई उद्योगों में उत्सर्जन मानकों का पालन नहीं होने से समस्या और बढ़ती है।
निर्माण और धूल प्रदूषण: ग्रैप-3 की पाबंदियां हटने के बाद शुरू हुई निर्माण गतिविधियों और बिना ढके माल ढुलाई से धूल हवा में लगातार फैल रही है, जिससे पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों की मात्रा बढ़ जाती है।
वाहन प्रदूषण: शहर में बढ़ते वाहनों की संख्या और जाम के कारण उच्च मात्रा में धुआं वातावरण में घुल रहा है। पुराने और बिना फिटनेस वाले वाहन प्रदूषण का बड़ा कारण हैं।
मौसम का प्रभाव: ठंड बढ़ने से हवा का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे प्रदूषक नीचे ही जमने लगते हैं। हवाओं की दिशा में बदलाव न होने से स्थिति और स्थिति खराब हो जाती है।