छिंदवाड़ा में बच्चे की मौत के बाद सात आयुर्वेदिक दवाओं पर लगी रोक
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक पांच महीने की बच्ची की कथित तौर पर आयुर्वेदिक दवाएं देने के बाद मौत हो गई। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग को सकते में डाल दिया है और तत्काल कार्रवाई करते हुए सात आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, जिले के बिछुआ कस्बा निवासी संदीप मिनोट की पांच महीने की बच्ची सर्दी-खांसी से पीड़ित थी। मेडिकल स्टोर संचालक की सलाह पर बच्ची को कासामृत सीरप और 16 पुड़िया में पाउडरनुमा दवाएं दी गईं। आरोप है कि इन दवाओं के सेवन के बाद बच्ची की तबीयत और बिगड़ गई, जिसके चलते उसकी मौत हो गई।
इस घटना की सूचना मिलते ही आयुष विभाग हरकत में आया और मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित आयुर्वेदिक दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे गए। जांच रिपोर्ट में इन दवाओं को अमानक पाया गया। जिला आयुष अधिकारी डॉ. प्रमिला यावतकर ने बताया कि जांच में कासामृत सीरप, गिलोय सत्व, कामदुधा रस, प्रवाल पिष्टी, मुक्ता शक्ति भस्म, लक्ष्मी विलास रस और कफ कुठार रस को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया गया है।
इन दवाओं के अमानक पाए जाने के बाद, विभाग ने तत्काल प्रभाव से इन दवाओं के विभिन्न बैचों की बिक्री और वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह कार्रवाई भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने और जन स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कुछ समय पूर्व छिंदवाड़ा सहित तीन जिलों में एक विशेष कफ सीरप के सेवन से 24 बच्चों की मौत की खबरें आई थीं। उस मामले में दो एलोपैथिक कफ सीरप, कोल्डि्रफ और नेक्स्ट्रो डीएफ को प्रतिबंधित किया गया था। इस नई घटना ने आयुर्वेदिक दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
